UPITS 2026: यूपी में स्वास्थ्य सुरक्षा का नया रिकॉर्ड, 6 करोड़ आयुष्मान कार्ड और 2.13 करोड़ परिवार योजना से जुड़े
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में साचीज ने स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियां प्रदर्शित कीं। प्रदेश में 6 करोड़ आयुष्मान कार्ड बने और 2.13 करोड़ परिवार योजना से जुड़े।
उत्तर प्रदेश में आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और कैशलेस चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से संचालित 'आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना' (AB PM-JAY) ने राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे को ऐतिहासिक ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो सेंटर एवं मार्ट में आयोजित 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026' (UPITS) के हॉल नंबर 8 में स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) द्वारा स्थापित विशेष पवेलियन इस बदलाव का जीवंत प्रमाण बन रहा है। "नई दिशा, नया संकल्प-आयुष्मान पीएमजेएवाई: बिल्डिंग हेल्थकेयर एक्सीलेंस इन उत्तर प्रदेश" थीम पर आधारित इस पवेलियन में जहां एक तरफ नागरिक मौके पर ही अपने स्वास्थ्य सुरक्षा कार्ड बनवा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अत्याधुनिक डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक चिकित्सा तकनीक का प्रदर्शन देश-विदेश के प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।
प्रदर्शनी के दौरान आयोजित एक उच्चस्तरीय तकनीकी सत्र में स्वास्थ्य सेवा से जुड़े विशेषज्ञों, चिकित्सा संस्थानों और कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों से संवाद करते हुए साचीज की मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने राज्य में योजना की प्रगति और भविष्य के विजन का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की नीति केवल कार्ड वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता, मानकीकृत प्रक्रियाओं और मरीजों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों तक ले जाना मुख्य प्राथमिकता है।
8 गंभीर बीमारियां शामिल: अंग प्रत्यारोपण से न्यूरो सर्जरी तक मुफ्त इलाज
साचीज की सीईओ ने बताया कि 'जर्नी ऑफ क्वालिटी' (Journey of Quality) पहल के माध्यम से राज्य के संबद्ध अस्पतालों को नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (NABH) के गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए तकनीकी सहयोग और निरंतर मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। इसका प्रत्यक्ष लाभ यह हुआ है कि अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, रोगी सुरक्षा और उपचार के परिणामों में अभूतपूर्व सुधार दर्ज किया गया है।
योजना के पैकेज में किए गए विस्तार की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि अब राज्य में आठ अत्यंत गंभीर और जटिल बीमारियों के उपचार को भी इसके दायरे में समाहित कर लिया गया है। इनमें शामिल हैं:
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अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण (Organ and Tissue Transplant)
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जटिल न्यूरो सर्जरी (Neuro Surgery)
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कैंसर विज्ञान (Oncology) व कीमोथेरेपी
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प्लास्टिक एवं रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी
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शिशु शल्य चिकित्सा (Pediatric Surgery)
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गंभीर बर्न मैनेजमेंट (Burn Care)
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ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जरी
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यूरोलॉजी (मूत्र रोग संबंधी सर्जरी)
अर्चना वर्मा ने प्रदेश के सुदूर और ग्रामीण अंचलों में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को आवश्यक बताया। उन्होंने निजी अस्पताल श्रृंखलाओं और बड़े कॉर्पोरेट चिकित्सा समूहों से आग्रह किया कि वे टियर-2 और टियर-3 शहरों में अपने सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल स्थापित करें, ताकि स्थानीय मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े महानगरों की ओर न भागना पड़े।
एनएचसीएक्स का पायलट प्रोजेक्ट और एआई-संचालित क्लेम जांच
साचीज के पवेलियन में डिजिटल हेल्थ के भविष्य का खाका प्रस्तुत करते हुए 'नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज' (NHCX) की रूपरेखा प्रदर्शित की गई। यह प्रणाली अस्पतालों और बीमा एजेंसियों के बीच क्लेम से संबंधित डेटा के निर्बाध और पारदर्शी आदान-प्रदान को संभव बनाती है।
प्रारंभिक चरण में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को प्रदेश के दो सरकारी और दो निजी अस्पतालों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा रहा है, जिसके लिए चिकित्सा संस्थानों के चयन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। एनएचसीएक्स के लागू होने से क्लेम निस्तारण की गति कई गुना तेज हो जाएगी और कागजी औपचारिकताओं में होने वाली देरी पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
इसके साथ ही पवेलियन में 'ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम' (TMS) के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित क्लेम ऑडिटिंग व्यवस्था का सजीव प्रदर्शन किया गया। यह स्मार्ट तकनीक किसी भी क्लेम में होने वाली संभावित विसंगतियों, डुप्लीकेसी और धोखाधड़ी की स्वचालित पहचान कर लेती है, जिससे सार्वजनिक धन का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होता है। पवेलियन में 'आयुष्मान सारथी ऐप', डिजिटल क्लेम प्लेटफॉर्म और एआई-आधारित त्वरित शिकायत निवारण तंत्र की कार्यप्रणाली भी प्रदर्शित की गई।
6 करोड़ कार्ड और 1 करोड़ से अधिक सफल उपचार का रिकॉर्ड
साचीज द्वारा जारी नवीनतम आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 9 सितंबर 2026 तक उत्तर प्रदेश में 6 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के स्वास्थ्य सुरक्षा कार्ड सफलतापूर्वक जारी किए जा चुके हैं। इसके माध्यम से राज्य के 2.13 करोड़ से अधिक परिवारों को ₹5 लाख प्रतिवर्ष तक के निशुल्क और गुणवत्तापूर्ण इलाज का सुरक्षा कवच प्राप्त हो चुका है।
अस्पतालों के नेटवर्क के संबंध में आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 2 अगस्त 2026 तक प्रदेश भर के 6,562 अस्पताल इस योजना के पैनल में शामिल किए जा चुके हैं। इनमें 2,910 सरकारी चिकित्सालय और 3,652 निजी अस्पताल शामिल हैं। 31 अगस्त तक इस व्यवस्था के तहत 1 करोड़ से अधिक गरीब और जरूरतमंद मरीजों को सफल इन-पेशेंट उपचार (Hospital Admissions) उपलब्ध कराया जा चुका है।
पवेलियन में जीएस यूनिवर्सिटी, एरा यूनिवर्सिटी, लखनऊ कैंसर इंस्टीट्यूट और यशोदा मेडिसिटी जैसे अग्रणी चिकित्सा संस्थानों के तकनीकी स्टॉल्स भी लगाए गए हैं। यहां रोबोटिक सर्जरी, उन्नत कैंसर स्क्रीनिंग, कनेक्टेड हेल्थकेयर डिवाइसेज और टेली-मेडिसिन के सजीव मॉडल्स के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश अब विश्वस्तरीय चिकित्सा तकनीकों को अपनाने में देश के अग्रणी राज्यों की पहली पंक्ति में खड़ा है।
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