सम्भल का बेनीपुर चक गांव, जहां रक्षाबंधन पर नहीं बंधती राखी, जानिए सदियों पुरानी त्याग और वचन की अनोखी गाथा
सम्भल के बेनीपुर चक गांव में रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जाता। इसके पीछे अलीगढ़ से जुड़ी सदियों पुरानी दोस्ती, त्याग और जमींदारी दान करने की ऐतिहासिक गाथा है।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
उत्तर प्रदेश के सम्भल जिले में स्थित बेनीपुर चक एक ऐसा गांव है, जहां रक्षाबंधन का त्योहार नहीं मनाया जाता। जब पूरा देश भाई-बहन के इस पावन पर्व पर खुशियां मना रहा होता है, तब इस गांव में सन्नाटा पसरा रहता है। इसके पीछे सदियों पुरानी एक ऐसी कहानी है, जो दोस्ती, त्याग और स्वाभिमान का अनोखा उदाहरण पेश करती है।
इस परंपरा की जड़ें अलीगढ़ जिले से जुड़ी हैं। सदियों पहले अलीगढ़ में एक यादव परिवार और ठाकुर परिवार के बीच अटूट और गहरी दोस्ती थी। दोनों परिवारों के बीच इतना प्रेम था कि दोनों घरों की बेटियां एक-दूसरे के भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा करती थीं। कहानी के अनुसार, एक बार रक्षाबंधन के दिन यादव परिवार की बेटी ने ठाकुर परिवार के भाई को राखी बांधी।
उपहार स्वरूप उसने ठाकुर परिवार से उनकी पसंदीदा घोड़ी मांग ली, जिसे ठाकुर परिवार ने खुशी-खुशी सहर्ष भेंट कर दिया। अगले वर्ष जब रक्षाबंधन आया, तो ठाकुर परिवार की बेटी ने यादव परिवार के भाई को राखी बांधी।
इस बार उपहार के रूप में ठाकुर की बेटी ने यादव परिवार से उनकी पूरी जमींदारी ही मांग ली। वचनबद्धता और स्वाभिमान को सर्वोपरि रखते हुए यादव परिवार ने बिना किसी झिझक के अपनी पूरी जमींदारी ठाकुर परिवार के नाम कर दी।
इसके बाद यादव परिवार अलीगढ़ से अपना सब कुछ छोड़कर सम्भल के ग्राम बेनीपुर चक में आकर बस गया। उसी ऐतिहासिक घटना और त्याग की याद में बेनीपुर चक में रक्षाबंधन न मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी पूरी निष्ठा के साथ निभाई जाती है।
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