Prakash Parv: सम्भल में गूंजा गुरु ग्रंथ साहिब की वाणी का संदेश, प्रकाश पर्व पर सजीर्तन-कीर्तन दरबार
गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार और गुरुद्वारा श्री गुरु गोविंद सिंह दरबार साहिब में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रथम
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार और गुरुद्वारा श्री गुरु गोविंद सिंह दरबार साहिब में शनिवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रथम प्रकाश पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में विशेष दीवान सजाया गया। बाहर से आए रागी जत्थों और कथावाचकों ने गुरबाणी, कीर्तन और प्रवचन के माध्यम से संगत को गुरु ग्रंथ साहिब जी की शिक्षाओं से अवगत कराया।
ज्ञानी हरविंदर सिंह ने बताया कि 1 सितंबर 1604 को श्री गुरु अर्जन देव जी द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को संपूर्ण रूप देकर श्री दरबार साहिब, अमृतसर में इसका पहला प्रकाश किया गया था। उन्होंने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी में छह गुरु साहिबान के साथ-साथ संतों और भक्तों की वाणी भी शामिल है। इसमें बाबा फरीद, संत कबीरदास और संत रविदास सहित अनेक महापुरुषों की वाणी सुशोभित है। मुख्य सेवादार कुलबीर सिंह ने कहा कि गुरु ग्रंथ साहिब जी किसी एक धर्म का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का साझा ग्रंथ है। इसकी वाणी आपसी भाईचारे, प्रेम और समानता का संदेश देती है। प्रकाश पर्व के दौरान कीर्तन दरबार, निशान साहिब के चोले की सेवा और गुरु के लंगर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संगत ने श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। इस दौरान विभिन्न जाति और धर्म के लोगों की मौजूदगी ने सर्वधर्म भाईचारे और एकता का संदेश दिया।
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