Sambhal News: सम्भल में मुफ्ती अजमल शाह के 65वें उर्स की शुरुआत, इल्म और अमन का पैगाम गूंजा
ऐतिहासिक शहर सम्भल की सरजमीं पर स्थित करीब 100 साल पुराने मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल: ऐतिहासिक शहर सम्भल की सरजमीं पर स्थित करीब 100 साल पुराने मरकजी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में हुजूर मुफ्ती मौहम्मद अजमल शाह साहब का 65वां सालाना उर्स अकीदत और एहतराम के साथ मनाया जा रहा है। उर्स के पहले कार्यक्रम में उलमा-ए-किराम ने मुफ्ती अजमल शाह साहब की जिंदगी, दीनी खिदमात, तालीमी योगदान और मुल्क से मोहब्बत के पैगाम पर रोशनी डाली।
मुस्लिम धर्मगुरु मुफ्ती आलम रजा नूरी ने कहा कि मुफ्ती मौहम्मद अजमल शाह साहब ने दीन और शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान दिया। उन्होंने बेशुमार किताबें लिखीं और समाज को अमन-शांति का संदेश दिया। धर्मगुरु के मुताबिक, उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ भी फतवा दिया था और अपनी खिदमात से संभल का नाम देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में रोशन किया।
- आधी रोटी खाइए, बच्चों को जरूर पढ़ाइए
मुफ्ती आलम रजा नूरी ने अपने संबोधन में शिक्षा की अहमियत पर जोर देते हुए लोगों से बच्चों को पढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा, “पांच करोड़ की प्रॉपर्टी बच्चे को मत दो, पांच रुपये का कलम बच्चे को दो।” उन्होंने कहा कि जहालत इंसान को गुलाम बनाती है, जबकि इल्म इंसान को बादशाह बनाता है। उनका संदेश था कि खर्चे कम करके भी बच्चों की शिक्षा पर जरूर ध्यान दिया जाना चाहिए। उर्स के पहले कार्यक्रम में दीनी-मिल्ली खिदमात करने वाले लोगों और लेख लिखने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया गया। मुफ्ती आलम रजा नूरी ने बताया कि मदरसे की ओर से ऐसे लोगों का सम्मान करने की परंपरा जारी है, जो शिक्षा और समाज की सेवा में योगदान देते हैं। उन्होंने तमाम अकीदतमंदों को अगले दिन दोपहर 12 बजकर 20 मिनट पर होने वाले कुल शरीफ में शामिल होने की दावत दी। उर्स के मौके पर मुफ्ती अजमल शाह साहब की तालीमी और दीनी विरासत को याद करते हुए लोगों तक शिक्षा, अमन और समाज की भलाई का संदेश पहुंचाया गया।
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