Vishwakarma Mela 2026: लखनऊ में सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- पहले की सरकारें सैफई महोत्सव और बग्गी में उलझी थीं

सीएम योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में विश्वकर्मा स्वरोजगार मेला 2026 और वीएसएसवाई 2.0 मार्जिन मनी पोर्टल का शुभारंभ किया। कारीगरों को 10 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण और टूलकिट मिलेगी।

By INA News Desk
Sep 17, 2026 - 23:04
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Vishwakarma Mela 2026: लखनऊ में सीएम योगी का विपक्ष पर तीखा हमला, बोले- पहले की सरकारें सैफई महोत्सव और बग्गी में उलझी थीं
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पारंपरिक शिल्पियों और दस्तकारों को आत्मनिर्भर उद्यमी बनाने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने व्यापक प्रदर्शनी तथा विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना (वीएसएसवाई) 2.0 के मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का औपचारिक उद्घाटन किया। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के पूर्ववर्ती राजनीतिक नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि पहले की सत्ताएं सैफई में महोत्सव आयोजित करने, सांस्कृतिक आयोजनों के नाम पर फिजूलखर्ची करने और विदेशों से बग्गी मंगाकर निजी उत्सव मनाने में व्यस्त रहती थीं। उनके पास ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दस्तकारों, कारीगरों और हस्तशिल्पियों के जीवन स्तर को सुधारने की न तो कोई ठोस योजना थी और न ही फुर्सत।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक समृद्धि का मुख्य आधार यहां का आत्मनिर्भर कारीगर और शिल्पी था, जो अपने हुनर के दम पर उद्यम चलाता था। आजादी के बाद लंबे समय तक नीतिगत उपेक्षा, आधुनिक तकनीक से दूरी और संस्थागत वित्तीय व्यवस्था के अभाव ने स्वावलंबी कारीगर को दिहाड़ी मजदूर बनने पर विवश कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में सत्ता संभालने के बाद उनकी सरकार ने इस ऐतिहासिक विसंगति को दूर करने का संकल्प लिया। वर्ष 2018 में ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) और 2019 में ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ की शुरुआत कर राज्य के हुनरमंदों को बाजार, पूंजी और तकनीक से सीधे जोड़ा गया।

भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे शिल्पी

भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के संयोग को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में शिल्प और निर्माण की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने पौराणिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान शिव का त्रिशूल, देवराज इंद्र का वज्र और भगवान श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी देवाधिदेव विश्वकर्मा के शिल्प कौशल का ही प्रतिरूप हैं।

रामायण काल का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंका विजय के समय सौ योजन चौड़े महासागर पर बिना किसी पिलर के पत्थरों का सेतु तैयार करने वाले नल और नील वस्तुतः भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र थे। अल्प समय में तैयार हुआ वह रामसेतु उस युग की अप्रतिम इंजीनियरिंग और कारीगरी का सबसे बड़ा साक्ष्य है। आज समाज में बढ़ई, लोहार, कुम्हार, राजमिस्त्री, नाई, धोबी और मोची जैसे पारंपरिक कार्यों से जुड़े करोड़ों लोग वास्तव में भगवान विश्वकर्मा की उसी पावन परंपरा के सजीव प्रतिनिधि हैं। इन वर्गों का सम्मान करना राष्ट्र निर्माण के मूल आधार को मजबूत करने जैसा है।

प्रशिक्षण अवधि में मानदेय और टूलकिट का अनूठा मॉडल

कारीगरों की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि दैनिक श्रम से परिवार चलाने वाले व्यक्ति के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होती थी कि यदि वह सीखने जाएगा तो घर का चूल्हा कैसे जलेगा। इस जमीनी समस्या को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशिक्षण का ऐसा मॉडल तैयार किया, जिसमें कारीगर को नुकसान न हो।

योजना के अंतर्गत चयनित दस्तकारों को 10 दिवसीय विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है। इस अवधि के दौरान कामगार के भरण-पोषण के लिए ₹5,000 का मानदेय सीधे उसके खाते में हस्तांतरित किया जाता है। प्रशिक्षण सफलता पूर्वक संपन्न होने पर संबंधित विधा की गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक टूलकिट (जिसका मूल्य ₹15,000 तक होता है) पूरी तरह निःशुल्क भेंट की जाती है। पिछले सात-आठ वर्षों के दौरान प्रदेश में 6 लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को आधुनिक टूलकिट और व्यावसायिक प्रशिक्षण से लाभान्वित किया जा चुका है।

दायरा बढ़ा: 16 से बढ़कर 25 हुए ट्रेड, युवा कौशल भी शामिल

योजना के विस्तार की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले चरण में 16 विधाएं शामिल थीं, जिनमें 11 मूल पारंपरिक पेशे थे। अब सामाजिक आवश्यकताओं को देखते हुए पांच नए पारंपरिक वर्गों को इसमें जोड़ा गया है जिनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाले माली, भड़भूजा और मछुआरा समुदाय शामिल हैं। इन वर्गों ने पीढ़ियों से समाज की बुनियादी जरूरतें पूरी की हैं, लेकिन कभी संस्थागत सहायता नहीं प्राप्त कर सके।

इसके अतिरिक्त वर्तमान डिजिटल और औद्योगिक युग की मांग के अनुसार युवाओं के लिए आधुनिक तकनीकी ट्रेड भी शामिल किए गए हैं। इनमें मोबाइल फोन रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मरम्मत, घरेलू विद्युत उपकरण मरम्मत, प्लंबिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर रिपेयर, सोलर पैनल इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी तथा ब्यूटी पार्लर एवं वैलनेस जैसे आधुनिक कार्य शामिल हैं। अब प्रदेश का कोई भी युवा अपनी व्यक्तिगत रुचि के अनुसार इन 25 ट्रेड में से किसी का भी चयन कर सम्मानजनक आजीविका कमा सकता है।

₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण की गारंटी

कारीगरों को महाजनी व्यवस्था के शोषण से मुक्त कराने के लिए वित्तीय ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत जहां ₹5 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है, वहीं पारंपरिक और तकनीकी कारीगरों के लिए यह सीमा बढ़ाकर ₹10 लाख तक कर दी गई है। यह ऋण पूरी तरह ब्याजमुक्त और बिना किसी बैंक गारंटी के उपलब्ध कराया जाएगा।

परियोजना लागत पर 10 से 15 प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सरकार की ओर से वहन की जाएगी। मुख्यमंत्री ने वित्तीय संस्थानों और बैंकों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि कारीगरों को ऋण उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की हीलाहवाली न की जाए। ऋण पर लगने वाले ब्याज का पूरा वित्तीय दायित्व राज्य सरकार अपने खजाने से वहन करेगी। कारीगर को केवल अपने हुनर और उद्यम पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

25 से 29 सितंबर तक हर जिले में विशेष मेगा शिविर

योजना का लाभ जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तय की गई समय-सीमा की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 सितंबर से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों में सघन टूलकिट वितरण एवं ऋण स्वीकृति कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में जिला प्रशासन, उद्योग विभाग और अग्रणी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ मौके पर उपस्थित रहेंगे, ताकि आवेदकों के ऋण प्रस्तावों को तत्काल स्वीकृत कर चेक सौंपे जा सकें।

राज्य के आर्थिक कायाकल्प पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में 96 लाख से अधिक सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) इकाइयां क्रियाशील हैं, जो सवा तीन करोड़ से अधिक नागरिकों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान कर रही हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उत्तर प्रदेश कभी ‘बीमारू’ राज्य नहीं था, बल्कि पूर्ववर्ती सरकारों में बैठे नीति-नियंताओं की मानसिकता बीमारू थी, जिन्होंने प्राकृतिक संसाधनों, उपजाऊ भूमि, विशाल जल संपदा और असीम युवा शक्ति के बावजूद राज्य को बदहाली और भ्रष्टाचार की ओर धकेल दिया था। आज यही उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था का अग्रणी ग्रोथ इंजन बन चुका है।

ग्रेटर नोएडा में इंटरनेशनल ट्रेड शो से मिलेंगे वैश्विक खरीदार

स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में भव्य ‘उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो’ का आयोजन किया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय मेले में राज्य के सूक्ष्म उद्यमियों और दस्तकारों के उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए 2,500 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं।

इस आयोजन में विश्व के विभिन्न देशों से 650 से अधिक विदेशी खरीदार (फॉरेन बायर्स) सम्मिलित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इस पांच दिवसीय ट्रेड शो के माध्यम से ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ तक का व्यावसायिक टर्नओवर और व्यापारिक अनुबंध होने की संभावना है। इस व्यापारिक गतिविधि से मिलने वाला सीधा लाभ सीधे गांवों, कस्बों और छोटे कारखानों में काम करने वाले वास्तविक कारीगरों और निर्माताओं तक पहुंचेगा।

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