Vishwakarma Shram Samman Yojana: लखनऊ में सीएम योगी ने बांटे टूलकिट और चेक, कामगारों को मिला स्वरोजगार का संबल
लखनऊ में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार मेले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कामगारों को टूलकिट और ऋण के चेक वितरित किए। योजना से पारंपरिक दस्तकारों को नई ताकत मिली है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पारंपरिक शिल्पकला और हस्तकौशल से जुड़े कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है।
भगवान विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर राजधानी लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में ‘विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला’ का आयोजन किया गया।
इस विशेष समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ के तहत प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए दस्तकारों, कामगारों और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार ऋण के स्वीकृति चेक और आधुनिक टूलकिट वितरित किए।
मंच से आर्थिक सहायता और आजीविका के आधुनिक संसाधन प्राप्त कर पारंपरिक पेशों से जुड़े हुनरमंदों के चेहरे खिल उठे।
योजना के लाभार्थियों ने सरकार की इस पहल को सराहा और बताया कि बाजार में आधुनिक उपकरणों के अभाव में जो काम पहले धीमी गति से होता था, अब वह नई तकनीक और पर्याप्त पूंजी की मदद से तेजी से आगे बढ़ेगा।
इससे न केवल उनकी पारिवारिक आय में सुधार होगा, बल्कि वे अन्य स्थानीय युवाओं को भी अपने साथ काम पर जोड़ने में सक्षम बनेंगे।
सैलून संचालक और बढ़ई कारीगरों को मिली वित्तीय मजबूती
समारोह के दौरान राजधानी लखनऊ के आलमबाग क्षेत्र निवासी मोहम्मद मुश्ताक को सैलून व्यवसाय के विस्तार के लिए दो लाख रुपये का ऋण चेक सौंपा गया। मुश्ताक पिछले 25 वर्षों से हेयर कटिंग और सैलून का कार्य कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
उन्होंने अपनी बात साझा करते हुए कहा कि लंबे समय तक सीमित संसाधनों के चलते वे अपनी दुकान का आधुनिकीकरण नहीं कर पा रहे थे। पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में कभी छोटे कामगारों को टूलकिट या संस्थागत ऋण से नहीं जोड़ा गया, लेकिन अब मुख्यमंत्री के हाथों वित्तीय सहयोग मिलने से वे अपने प्रतिष्ठान को आधुनिक स्वरूप दे सकेंगे।
इसी क्रम में काष्ठकला यानी बढ़ई के पेशे से जुड़े कारीगरों को भी एक-एक लाख रुपये के चेक वितरित किए गए। पिछले आठ वर्षों से कारपेंटर का कार्य कर रहे युवा राहुल शर्मा को एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। राहुल ने बताया कि सरकार से पूर्व में मिले प्रशिक्षण और अब प्राप्त इस कार्यशील पूंजी से वे लकड़ी की कटाई और फिनिशिंग के आधुनिक इलेक्ट्रिक टूल्स खरीदेंगे।
वहीं उन्नाव जनपद से आए बढ़ई आनंद कुमार को भी एक लाख रुपये की आर्थिक मदद मिली। आनंद ने बताया कि छोटे शहरों और ग्रामीण अंचलों के कारीगरों तक सीधी आर्थिक पहुंच सुनिश्चित होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है।
सिलाई मशीन पाकर महिलाओं ने बढ़ाया आत्मनिर्भरता की ओर कदम
महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण आजीविका के दृष्टिकोण से कार्यक्रम में महिला दर्जी और सिलाई कार्य से जुड़ी कारीगरों को उन्नत सिलाई मशीनें प्रदान की गईं।
बाराबंकी जनपद की निवासी वंदना और रमा जायसवाल को मुख्यमंत्री के हाथों नई सिलाई मशीनें मिलीं। सिलाई का औपचारिक प्रशिक्षण पूरा कर चुकीं वंदना ने बताया कि वे घर से ही कपड़े सिलने का काम करती हैं और इससे होने वाली कमाई से परिवार के दैनिक खर्चों में हाथ बंटाती हैं।
वहीं रमा जायसवाल ने बताया कि उन्होंने विभाग के पोर्टल पर टूलकिट वितरण के लिए आवेदन किया था। आवेदन प्रक्रिया के सत्यापन के बाद उन्हें चयन की सूचना मिली।
घर की तमाम जिम्मेदारियों को संभालते हुए वे सिलाई कार्य के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने कहा कि समय पर आवश्यक उपकरण मिलने से महिलाओं का मनोबल बढ़ता है और वे घर बैठे सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में सक्षम होती हैं।
सुनार और कुम्हार वर्ग को भी तकनीकी संबल
पारंपरिक स्वर्ण आभूषण निर्माण से जुड़े कानपुर निवासी अवधेश को सुनार का आधुनिक टूलकिट बॉक्स प्रदान किया गया। विगत दो दशकों से जेवर निर्माण का कार्य कर रहे अवधेश ने बताया कि आभूषणों की बारीक नक्काशी और डिजाइनिंग के लिए आधुनिक टूल्स बेहद जरूरी होते हैं। इस टूलकिट से उनके काम की गुणवत्ता सुधरेगी और काम जल्दी पूरा होगा।
इसी प्रकार मिट्टी के बर्तन और कलाकृतियां बनाने वाले अयोध्या के राम को कुम्हार विधा के तहत आधुनिक चाक व सहायक उपकरणों की टूलकिट सौंपी गई। राम ने कहा कि पारंपरिक चाक पर शारीरिक श्रम अधिक लगता था और उत्पादन कम होता था, लेकिन आधुनिक मशीनरी की मदद से अब वे कम समय में दीये, मटके और सजावटी वस्तुएं अधिक मात्रा में तैयार कर सकेंगे।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे मिलने से पारंपरिक शिल्पकला को फिर से जीवित रहने का भरोसा मिला है।
क्या है योजना का उद्देश्य और जमीनी प्रभाव?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों जैसे बढ़ई, दर्जी, लोहार, कुम्हार, सुनार, नाई, मोची और हलवाई आदि को आधुनिक तकनीक से जोड़ना है।
इसके तहत पात्र लाभार्थियों को 6 दिवसीय नि:शुल्क कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के उपरांत संबंधित ट्रेड का आधुनिक टूलकिट पूरी तरह नि:शुल्क प्रदान किया जाता है।
साथ ही व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए बैंकों के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर मुद्रा योजना अथवा अन्य योजनाओं के तहत बिना किसी कठिन गारंटी के ऋण उपलब्ध कराया जाता है।
प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना से प्रदेश में पारंपरिक दस्तकारों का पलायन रुका है और स्थानीय स्तर पर सूक्ष्म अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिली है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर दोहराया कि स्थानीय कारीगर ही आत्मनिर्भर भारत और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की बुनियाद हैं। जब छोटे कारीगर मजबूत होंगे, तभी स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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