यूपी में मतदाता सूची कार्यों पर सख्ती: लापरवाही पर नपेंगे जिला निर्वाचन अधिकारी, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कड़े निर्देश
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची कार्यों में लापरवाही पर जिला निर्वाचन अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने दिए कड़े निर्देश।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची को पूर्णतया शुद्ध, अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम 1960 के तहत जनपदों में मतदाता सूची के समन्वय, पर्यवेक्षण, अनुश्रवण तथा गुणवत्ता नियंत्रण की अंतिम और संपूर्ण जिम्मेदारी सीधे जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीएम) की होगी। यह दायित्व केवल निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) अथवा अन्य अधीनस्थ अमले तक सीमित नहीं माना जाएगा।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी जिला निर्वाचन अधिकारी प्रतिदिन अपने आधिकारिक डीईओ लॉगिन से ईसीआई नेट पर स्वयं उपस्थित होकर कार्यों की प्रगति का जायजा लें। किसी भी जनपद में यदि अनावश्यक रूप से आवेदन लंबित मिलते हैं, कर्मियों के प्रोफाइल अपूर्ण पाए जाते हैं, लॉगिन निष्क्रिय दिखती है या पर्यवेक्षण में ढिलाई सामने आती है, तो संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी की सीधी जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निर्देशों के मुताबिक, नए मतदाता पंजीकरण के लिए फार्म-6, प्रवासी मतदाताओं के लिए फार्म-6ए, नाम विलोपन के लिए फार्म-7 और संशोधन व स्थानांतरण से जुड़े फार्म-8 के निस्तारण की दैनिक निगरानी अनिवार्य कर दी गई है। किसी भी स्तर पर आवेदनों के असामान्य विलंब को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके अतिरिक्त अधिकारियों को अपने गोपनीय लॉगिन क्रेडेंशियल, पासवर्ड और ओटीपी किसी अन्य व्यक्ति से साझा न करने की सख्त हिदायत दी गई है। गलत अधिकारियों को मार्क हुए आवेदनों को तत्काल सही पते पर री-असाइन करने और गैर-जनपद के मामलों को बिना देरी अग्रेषित करने के आदेश दिए गए हैं।
मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) और मतदाता सूची से जुड़ी जनशिकायतों के गुणवत्तापूर्ण समाधान पर जोर देते हुए राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी) की दैनिक समीक्षा करने को कहा गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्देशित किया कि जिला निर्वाचन अधिकारी स्वयं या किसी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से शिकायतों के निस्तारण का नियमित सैंपल परीक्षण कराएं, ताकि समाधान केवल कागजी न होकर वास्तविक और संतोषजनक हो। इसके लिए जनपदों में साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी।
नागरिक सुविधा के लिए शुरू की गई 'बुक ए कॉल विद बीएलओ' सेवा पर भी कड़े निर्देश दिए गए हैं। पोर्टल अथवा ऐप के माध्यम से नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई कोई भी कॉल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) ने तय समय में संपर्क नहीं किया या बिना बात किए ही पोर्टल पर भ्रामक स्टेटस दर्ज किया, तो ऐसे कर्मियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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