मदरसे में शुक्रवार की छुट्टी बंद होने पर बोले मौलाना वसी अशरफ- कोई परेशानी नहीं, बस बच्चों की पढ़ाई हो ज्यादा!
उत्तराखंड के मदरसों में शुक्रवार की जगह रविवार को छुट्टी के फैसले पर मौलाना वसी अशरफ का बयान। कहा- अवकाश किसी भी दिन हो, तालीम और जुमे की नमाज का समय जरूरी।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
उत्तराखंड में मदरसों की शुक्रवार की साप्ताहिक छुट्टी की जगह रविवार को अवकाश किए जाने के फैसले पर मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना वसी अशरफ का बयान सामने आया है। मौलाना ने कहा कि इस्लामी नजरिए से सातों दिन एक जैसे हैं, छुट्टी शुक्रवार को हो या रविवार को, उन्हें कोई परेशानी नहीं है। हालांकि, उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और सरकार के मंत्रियों से अपील की कि जुमे की नमाज के लिए छात्रों और शिक्षकों को पर्याप्त समय दिया जाए। मौलाना ने यह भी कहा कि मदरसों में ज्यादा से ज्यादा दिन पढ़ाई होनी चाहिए।
उत्तराखंड में मदरसों की साप्ताहिक छुट्टी को लेकर सरकार के फैसले पर मौलाना वसी अशरफ ने अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लाम में सातों दिन एक समान हैं। शुक्रवार यानी जुमे के दिन विशेष रूप से नमाज अदा करने की अहमियत है, लेकिन साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को हो या रविवार को, इससे उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।

मौलाना वसी अशरफ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, शिक्षा मंत्री और गृह मंत्री से अपील करते हुए कहा कि जुमे के दिन मुसलमान सामूहिक रूप से नमाज अदा करते हैं। ऐसे में स्कूलों के छात्रों और शिक्षकों को इंटरवल के दौरान इतना समय मिलना चाहिए कि वे अपनी पढ़ाई और अन्य गतिविधियों के साथ जुमे की नमाज भी अदा कर सकें।
वहीं, मदरसों में स्कूलों जैसे नियम और छुट्टियां लागू होने के सवाल पर मौलाना ने कहा कि स्कूलों में छुट्टियां अधिक होने से मदरसों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। उन्होंने साफ कहा कि उनकी प्राथमिकता बच्चों की तालीम है और ज्यादा से ज्यादा दिन पढ़ाई होनी चाहिए, ताकि छात्र बेहतर शिक्षा हासिल कर सकें और शिक्षक भी उन्हें अधिक समय दे सकें। मौलाना के बयान का संदेश साफ है छुट्टी किसी भी दिन हो, लेकिन पढ़ाई भी जारी रहे और जुमे की नमाज के लिए जरूरी समय भी मिले।
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