वाल्मीकि जयंती पर बिठूर आएंगे सीएम योगी: 411 करोड़ की देंगे सौगात, रामायण सर्किट से संवर रहे पौराणिक स्थल
महर्षि वाल्मीकि जयंती पर सीएम योगी आदित्यनाथ बिठूर आश्रम में पूजा-अर्चना करेंगे और 411 करोड़ की सौगात देंगे। यूपी में रामायण सर्किट से वाल्मीकि स्थलों का कायाकल्प जारी है।
लखनऊ। महर्षि वाल्मीकि जयंती के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को ऐतिहासिक एवं पौराणिक तपोभूमि बिठूर पहुंचेंगे। मुख्यमंत्री यहां स्थित महर्षि वाल्मीकि आश्रम में आयोजित रामायण पाठ और विशेष पूजा-अर्चना में भाग लेकर आदिकवि को नमन करेंगे। मान्यता है कि इसी तपोस्थली पर महाकाव्य रामायण की रचना हुई थी, माता सीता को आश्रय मिला था और लव-कुश का जन्म हुआ था। इस दौरान मुख्यमंत्री बिठूर और बिल्हौर क्षेत्रवासियों को 411 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली विभिन्न विकास परियोजनाओं की सौगात देंगे तथा शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सम्मानित भी करेंगे।
राज्य सरकार आदिकवि महर्षि वाल्मीकि से जुड़े पौराणिक और सांस्कृतिक स्थलों को संवारने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य कर रही है। 'रामायण सर्किट' और 'राम वन-गमन पथ' के माध्यम से चित्रकूट, अयोध्या और इटावा समेत कई जनपदों में स्थित ऐतिहासिक धरोहरों का कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को गति मिलने के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं सुलभ हो रही हैं।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश की धरती रामायण कालीन स्मृतियों से समृद्ध है। चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम को भव्य स्वरूप दिया गया है, जहां 12.5 फीट ऊंची कांस्य प्रतिमा स्थापित की जा चुकी है और 11.20 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक पर्यटन सुविधा केंद्र तैयार हो रहा है। इसके साथ ही लालापुर के प्राचीन हनुमान मंदिर का विकास, तमसा नदी पर वाल्मीकि घाट का निर्माण, परिक्रमा पथ और आरती स्थल के विकास के लिए 15 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतारी जा रही हैं। अयोध्या में वाल्मीकि आश्रम के लिए 1.07 करोड़ रुपये तथा इटावा के बेला गांव स्थित प्राचीन मंदिर के लिए 83 लाख रुपये से अधिक स्वीकृत किए गए हैं।
अयोध्या में आदिकवि की स्मृति को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नामकरण महर्षि वाल्मीकि के नाम पर किया गया है। साथ ही अयोध्या का वाल्मीकि भवन उनकी साहित्यिक विरासत को संजोए हुए है, जिसकी दीवारों पर संस्कृत में संपूर्ण रामायण अंकित है।
अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि की विरासत भारतीय सनातन संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। सरकार का संकल्प इन स्थलों का संरक्षण और विकास कर नई पीढ़ी को उनके जीवन दर्शन व नैतिक आदर्शों से जोड़ना है। बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से देश-विदेश के श्रद्धालुओं का आवागमन और अधिक सुगम होगा।
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