नव वर्ष पर नवगीत- महाकाल के महाग्रंथ का, नया पृष्ठ फिर आज खुल रहा...                                                                                           

महाकाल के महाग्रंथ का नया पृष्ठ फिर आज खुल रहा.... वह काटोगे, जो बोया है.

Jan 1, 2025 - 03:40
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नव वर्ष पर नवगीत- महाकाल के महाग्रंथ का, नया पृष्ठ फिर आज खुल रहा...                                                                                            

संजीव वर्मा सलिल                                                               

नव वर्ष पर नवगीत 
*
महाकाल के महाग्रंथ का
नया पृष्ठ फिर आज खुल रहा....
*
वह काटोगे,
जो बोया है.
वह पाओगे,
जो खोया है.
सत्य-असत, शुभ-अशुभ तुला पर
कर्म-मर्म सब आज तुल रहा....
*
खुद अपना
मूल्यांकन कर लो.
निज मन का
छायांकन कर लो.
तम-उजास को जोड़ सके जो
कहीं बनाया कोई पुल रहा?...
*
तुमने कितने
बाग़ लगाये?
श्रम-सीकर
कब-कहाँ बहाए?
स्नेह-सलिल कब सींचा?
बगिया में आभारी कौन गुल रहा?...

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*
स्नेह-साधना करी
'सलिल' कब.
दीन-हीन में
दिखे कभी रब?
चित्रगुप्त की कर्म-तुला पर
खरा कौन सा कर्म तुल रहा?...
*
खाली हाथ?
न रो-पछताओ.
कंकर से
शंकर बन जाओ.
ज़हर पियो, हँस अमृत बाँटो.
देखोगे मन मलिन धुल रहा...
*

संजीव वर्मा सलिल 
विश्ववाणी हिंदी संस्थान, जबलपुर

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