देवबंद में सरकारी जमीन पर बने धार्मिक स्थलों और मदरसों पर सुनवाई टली, बार संघ के अवकाश के कारण 27 जुलाई की नई तिथि तय
देवबंद में सरकारी जमीन पर अवैध रूप से संचालित मदरसों व मस्जिदों के नोटिस मामले की सुनवाई फिर टली। बार संघ के अवकाश के चलते अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
देवबंद क्षेत्र में सरकारी भूमि पर कथित रूप से बिना अनुमति संचालित की जा रही मस्जिदों, मदरसों और मजारों के खिलाफ जारी प्रशासनिक नोटिसों की सुनवाई एक बार फिर टल गई है। तय समय के अनुसार शुक्रवार को संबंधित प्रबंधन और मुतवल्ली तहसीलदार के समक्ष उपस्थित हुए, लेकिन बार एसोसिएशन के अवकाश पर होने के कारण मामले की वैधानिक कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। प्रशासन ने अब इस मामले में सुनवाई के लिए 27 जुलाई की नई समय-सीमा निर्धारित की है।
राजस्व प्रशासन ने बेदखली और सरकारी जमीन से कब्जा हटाने से जुड़ी धारा 67 के तहत कई धार्मिक स्थलों व शैक्षणिक संस्थानों के जिम्मेदार लोगों को नोटिस भेजे हैं। इनमें अक्सा मस्जिद सोहनचिड़ा के प्रतिनिधि अहसान, मदीना मस्जिद पंडोली नागल के प्रबंधक रिजवान, मदरसा दारुस्सलाम छलौली के प्रतिनिधि तौसीफ, अंबेहटा शेखा स्थित मदरसे के मुतवल्ली मुर्तजा, पहाड़पुर मस्जिद के प्रतिनिधि हाफिज गुलबहार तथा अंबेहटा शेखा की मस्जिद के मुतवल्ली मोहतसिम के नाम शामिल हैं। इन सभी पक्षों को अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए बुलाया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस मामले में सबसे पहले 13 जुलाई की समय-सीमा तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 20 जुलाई किया गया। इसके उपरांत संबंधित पक्षों की मांग पर सुनवाई के लिए 24 जुलाई का अवसर दिया गया था। हालांकि, वकीलों की हड़ताल और कामकाज ठप रहने के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। अब तहसीलदार न्यायालय ने सभी नामित पक्षकारों को 27 जुलाई को उपस्थित होकर साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखने के स्पष्ट आदेश जारी किए हैं।
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