ज़हर बन रहा आलू! सम्भल के कोल्ड स्टोरेज में रंग लगाकर बिक रहा 'नया' और 'शुगर-फ्री' आलू, कैमरे में कैद हुआ खेल
सम्भल के कोल्ड स्टोरेज में पुराने आलू पर केमिकल रंग लगाकर नया और शुगर फ्री बताकर बेचने का मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल उठे।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में आलू की आड़ में लोगों की सेहत से कथित तौर पर बड़ा खिलवाड़ किया जा रहा है। आरोप है कि कोल्ड स्टोरेज में खराब और पुराने आलू पर फर्श टाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाला पीला और मटमैला रंग लगाकर उसे नया और "शुगर-फ्री" आलू बताकर बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
इस पूरे कथित खेल का खुलासा एक लेबर ठेकेदार के कैमरे पर आए बयान से हुआ है, जिसने कोल्ड स्टोरेज में चल रही गतिविधियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
बताया जा रहा है कि बाजार में अभी नया आलू आया ही नहीं है, लेकिन दुकानों पर "नया आलू" और "शुगर-फ्री आलू" के नाम पर ग्राहकों से 50 रुपये प्रति किलो तक वसूले जा रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि जिन बोरियों में आलू बेचा जा रहा है, उन पर "शुगर-फ्री" का कोई आधिकारिक चिन्ह या प्रमाण नहीं होता, फिर भी ग्राहकों को गुमराह किया जा रहा है।
इस मामले में जिला उद्यान अधिकारी ने मई माह में ही कम बारिश के कारण आलू खराब होने और उसमें मिलावट की आशंका जताते हुए संबंधित विभागों को पत्र लिखा था।
इसके बावजूद आरोप है कि खाद्य सुरक्षा विभाग ने अब तक किसी भी कोल्ड स्टोरेज संचालक के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। वहीं उद्यान विभाग ने इस तरह की मिलावट को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और मिलावटखोरों की कथित सांठगांठ के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस गंभीर मामले की निष्पक्ष जांच कर मिलावट के इस कथित नेटवर्क पर कार्रवाई करेगा या फिर लोगों की थाली तक ज़हर पहुंचाने का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?
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