देवबंद में मदरसा और मस्जिद नोटिस विवाद: तहसीलदार कोर्ट में दर्ज हुए लेखपालों के बयान, सुनवाई जारी
देवबंद में सरकारी भूमि पर धार्मिक स्थलों के नोटिस मामले में तहसीलदार कोर्ट में लेखपालों के बयान दर्ज हुए। साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर सुनवाई जारी।
देवबंद। सार्वजनिक व ग्राम समाज की भूमि पर निर्मित मदरसों, मस्जिदों और मजारों के संबंध में राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत जारी किए गए विधिक नोटिसों के प्रकरण में तहसीलदार न्यायालय में राजस्व कर्मियों के बयान पुनः कलमबंद किए गए। इस महत्वपूर्ण मामले में दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत दावों और अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
प्रकरण की पृष्ठभूमि के अनुसार, संबंधित धार्मिक स्थलों के मुतवल्लियों और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों द्वारा भूमि स्वामित्व व निर्माण से जुड़े सभी आवश्यक अभिलेख पूर्व में ही न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जा चुके हैं। वहीं दूसरी ओर ग्राम समाज पक्ष की ओर से भी भूमि अभिलेख, नक्शा नजरी और संबंधित साक्ष्य दाखिल किए गए थे, जिसके क्रम में लेखपालों के प्रारंभिक बयान दर्ज हुए थे। पूर्व में अधिवक्ताओं की कार्य से विरति, कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासनिक व्यस्तता और अन्य अपरिहार्य कारणों से वाद की नियमित सुनवाई प्रभावित होती रही, जिसके चलते नियत समय पर जिरह पूरी नहीं हो सकी थी।
न्यायालय कक्ष में हुई कार्यवाही के दौरान ग्राम समाज के लेखपालों को पुनः तलब कर उनके बयान दर्ज कराए गए तथा राजस्व अभिलेखों का भौतिक मिलान किया गया। दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं द्वारा विधिक दलीलें प्रस्तुत की गईं। राजस्व न्यायालय ने साक्ष्यों और बयानों को पत्रावली पर लेते हुए अग्रिम विधिक कार्यवाही और आगे की जिरह के लिए अगली तिथि निर्धारित कर दी है। प्रशासन का कहना है कि राजस्व नियमों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच के आधार पर ही प्रकरण में अंतिम आदेश पारित किया जाएगा।
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