Festive Cyber Fraud: त्योहारों पर दान और उपहार के नाम पर बड़ा ऑनलाइन खेल, नकली QR कोड और फर्जी लिंक से खाली हो रहे खाते

त्योहारों में दान, चंदे और फेस्टिव रिवॉर्ड्स के नाम पर साइबर अपराधी सक्रिय हैं। नकली क्यूआर कोड और फिशिंग लिंक के जरिए खातों में सेंध लगाई जा रही है। जानिए बचने के जरूरी उपाय।

By INA News Desk
Sep 16, 2026 - 17:09
4 Views
Festive Cyber Fraud: त्योहारों पर दान और उपहार के नाम पर बड़ा ऑनलाइन खेल, नकली QR कोड और फर्जी लिंक से खाली हो रहे खाते
  • Festive Cyber Fraud: त्योहारों पर दान और उपहार के नाम पर बड़ा ऑनलाइन खेल, नकली QR कोड और फर्जी लिंक से खाली हो रहे खाते
  • Cyber Alert: दीपावली पर डिजिटल दान से पहले रहें सतर्क, ऐसे काम कर रहा है ठगों का नया नेटवर्क
  • Online Scam Alert: धार्मिक चंदे और बोनस गिफ्ट की आड़ में साइबर सेंधमारी, आपकी एक चूक करा सकती है भारी वित्तीय नुकसान
  • Fake QR Code Fraud: त्योहारों की खुशियों में न लगे ठगी का ग्रहण, जानिए दान और ऑफर्स से जुड़े साइबर अपराध के नए हथकंडे

नई दिल्ली। त्योहारों के इस मौसम में जहां लोग खरीदारी, पूजा-पाठ और परोपकार के कार्यों में जुटे हैं, वहीं साइबर अपराधियों का एक बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय हो चुका है। धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार, अनाथालयों में भोजन वितरण, गोशालाओं के लिए सहयोग और जरूरतमंदों की मदद के नाम पर डिजिटल दान मांगने का नया ट्रेंड इन दिनों तेजी से बढ़ा है। साइबर सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस इकाइयों के अनुसार, ठगों ने लोगों की धार्मिक आस्था और उदारता को अपना हथियार बना लिया है। इसके तहत नकली क्यूआर कोड, क्लोन की गई वेबसाइट्स और सोशल मीडिया पर भावनात्मक वीडियो के जरिए फर्जी लिंक फैलाकर खातों से जमा पूंजी साफ की जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल भुगतान की सुगमता के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी भारी वित्तीय जोखिम में बदल जाती है। त्योहारों के समय जब लोग जल्दी में होते हैं और भावना के वशीभूत होकर दान करने का विचार करते हैं, ठीक उसी समय शातिर साइबर ठग अपने जाल में फंसा लेते हैं।

  • कैसे बिछाया जा रहा है नकली क्यूआर कोड का जाल?

त्योहारों के मौके पर सबसे आम और घातक तरीका 'क्यूआर कोड स्वैपिंग' (QR Code Swapping) और 'क्यूआर कोड फिशिंग' का देखा जा रहा है। साइबर अपराधी प्रसिद्ध धर्मार्थ संस्थाओं, मंदिरों या कल्याणकारी ट्रस्टों के नाम से मिलते-जुलते पोस्टर और पर्चे सोशल मीडिया पर प्रसारित करते हैं। इन पोस्टरों पर एक क्यूआर कोड दिया जाता है, जिसे स्कैन करने पर पैसा सीधे ठगों के बैंक खातों या म्यूल (किराए के) खातों में चला जाता है।

इतना ही नहीं, भीड़भाड़ वाले पंडालों, सार्वजनिक पूजा स्थलों और बाजारों में लगे वास्तविक मर्चेंट या चैरिटी पोस्टरों पर असामाजिक तत्व अपने व्यक्तिगत क्यूआर कोड का स्टीकर ऊपर से चिपका देते हैं। जब कोई व्यक्ति संस्था का खाता समझकर उसे स्कैन करता है, तो लेन-देन किसी अज्ञात खाते में पूरा हो जाता है। तकनीकी दृष्टि से क्यूआर कोड केवल एक यूआरएल या यूपीआई स्ट्रिंग होता है, जिसे देखकर यह पहचानना मुश्किल होता है कि वह सही खाते से जुड़ा है या फर्जी से।

  • फिशिंग लिंक और भावनात्मक अपील का खेल

व्हाट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक जैसे माध्यमों पर इन दिनों संदेशों की बाढ़ आई हुई है। इनमें कुछ इस तरह के दावे किए जाते हैं: "इस दीपावली किसी भूखे को भोजन कराएं, मात्र 101 रुपये में सहयोग दें" या "धार्मिक संस्थान की ओर से मुफ्त मिठाई और उपहार वितरण, कूपन पाने के लिए लिंक पर क्लिक करें।"

इन संदेशों के साथ एक अनवेरिफाइड लिंक जोड़ा जाता है। जैसे ही कोई उपभोक्ता उस लिंक को खोलता है:

वह एक ऐसी फर्जी वेबसाइट पर पहुंचता है, जो देखने में बिल्कुल किसी प्रतिष्ठित ट्रस्ट या सरकारी पोर्टल जैसी लगती है।

वहां दान के लिए बैंक विवरण, यूपीआई पिन, या कार्ड की जानकारी मांगी जाती है।

कई बार लिंक पर क्लिक करते ही फोन में बैकग्राउंड में एक मैलवेयर (हानिकारक सॉफ्टवेयर) डाउनलोड हो जाता है, जो मोबाइल में आने वाले ओटीपी और संदेशों को सीधे ठगों के सर्वर पर फॉरवर्ड कर देता है।

  • फेस्टिव गिफ्ट और लॉटरी के नाम पर भी समानांतर ठगी

दान के अतिरिक्त, त्योहारों पर मुफ्त उपहार और बोनस के नाम पर भी बड़े पैमाने पर जालसाजी चल रही है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की त्योहारी सेल का फायदा उठाकर फर्जी लॉटरी संदेश भेजे जा रहे हैं। इसमें दावा किया जाता है कि उपभोक्ता ने एक महंगा मोबाइल फोन या नकद उपहार जीता है, जिसे पाने के लिए केवल 'प्रोसेसिंग फीस' या 'टैक्स' के रूप में एक छोटी राशि जमा करनी होगी। लोग उपहार के लालच में आकर वह राशि भेज देते हैं और बाद में संपर्क टूट जाता है।

  • सावधानी ही एकमात्र बचाव: इन जरूरी बातों का रखें ध्यान

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक का सुरक्षित उपयोग ही इस प्रकार के अपराधों से बचा सकता है। किसी भी संस्था को ऑनलाइन दान देने से पूर्व कुछ बुनियादी जांच अवश्य करनी चाहिए:

संस्था की प्रामाणिकता जांचें: किसी भी अंजान सोशल मीडिया पोस्ट पर दिए गए क्यूआर कोड को सीधे स्कैन न करें। जिस संस्था को आप दान देना चाहते हैं, उसकी आधिकारिक और सत्यापित वेबसाइट पर जाकर ही बैंक खाते या यूपीआई विवरण की पुष्टि करें।

पेमेंट से पहले नाम का मिलान: यूपीआई ऐप से क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद स्क्रीन पर प्रदर्शित होने वाले लाभार्थी के नाम को ध्यान से पढ़ें। यदि किसी ट्रस्ट के नाम की जगह किसी व्यक्ति का निजी नाम दिखाई दे, तो भुगतान तुरंत रोक दें।

पिन केवल पैसे भेजने के लिए: यह तकनीकी सिद्धांत हमेशा याद रखें कि पैसा प्राप्त करने या दान देने के बाद कोई 'रिफंड' या 'कैशबैक' लेने के लिए यूपीआई पिन डालने की आवश्यकता नहीं होती। यूपीआई पिन केवल तभी दर्ज किया जाता है जब आपके खाते से राशि कटनी हो।

अज्ञात लिंक से बचें: किसी भी ऐसे संदेश पर भरोसा न करें जिसमें अत्यधिक भावनात्मक भाषा का उपयोग कर तुरंत दान देने का दबाव बनाया गया हो। शॉर्ट यूआरएल (जैसे bit.ly या अन्य छोटे लिंक) पर सीधे क्लिक करने से परहेज करें।

  • ठगी होने पर क्या करें?

यदि किसी कारणवश कोई व्यक्ति ऐसे फर्जीवाड़े का शिकार हो जाता है, तो बिना समय गंवाए पहले 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती एक-दो घंटे) में कार्रवाई करना आवश्यक है। तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें और घटना की पूरी जानकारी दें। इसके साथ ही केंद्र सरकार के नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर जाकर ट्रांजेक्शन आईडी, मोबाइल नंबर और स्क्रीनशॉट के साथ औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा, अपने संबंधित बैंक को तुरंत सूचित कर उस खाते या यूपीआई आईडी को ब्लॉक कराएं, ताकि आगे की अनाधिकृत निकासी पर रोक लगाई जा सके।

Also Read- Noida Cyber Fraud: नोएडा में महिला की FD तोड़कर साइबर ठगों ने निकाले 19 लाख रुपये, जानें पूरा मामला

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow