IPS Sanjukta Parashar: 'आयरन लेडी' संजुक्ता पराशर ने रचा इतिहास, सीआरपीएफ की खूंखार कोबरा कमांडो यूनिट की बनीं पहली महिला प्रमुख
2006 बैच की चर्चित आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर ने सीआरपीएफ की विशेष जंगल युद्धक कमांडो यूनिट 'कोबरा' (CoBRA) की पहली महिला प्रमुख बनकर नया इतिहास रच दिया है।
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नई दिल्ली। भारत की आंतरिक सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अभियानों के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सबसे दुर्दांत, चुस्त और दुर्गम जंगलों में गुरिल्ला युद्ध लड़ने वाली विशिष्ट कमांडो यूनिट 'कोबरा' (कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन - CoBRA) को अपनी पहली महिला प्रमुख मिल गई है। असम-मेघालय कैडर की 2006 बैच की तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी संजुक्ता पराशर को इस प्रतिष्ठित बल की कमान सौंपी गई है। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश के तहत महानिरीक्षक (आईजी) स्तर की इस तैनाती के साथ ही संजुक्ता पराशर कोबरा सेक्टर का नेतृत्व करने वाली देश की पहली महिला पुलिस अधिकारी बन गई हैं।
असम के बीहड़ जंगलों में उग्रवादियों के खिलाफ अनगिनत सफल ऑपरेशनों का प्रत्यक्ष नेतृत्व करने वाली संजुक्ता पराशर को सुरक्षा हलकों और आम जनमानस में 'आयरन लेडी ऑफ असम' के नाम से जाना जाता है। उनकी इस नियुक्ति को भारतीय सुरक्षा बलों में महिला अधिकारियों की सामरिक भागीदारी, लड़ाकू नेतृत्व और लैंगिक समानता की दिशा में एक युगांतरकारी मील का पत्थर माना जा रहा है।
- क्या है कोबरा (CoBRA) और क्यों मानी जाती है इतनी खतरनाक?
कोबरा का गठन वर्ष 2008 में देश के वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से प्रभावित घने जंगलों में निर्णायक ऑपरेशंस को अंजाम देने के लिए किया गया था। यह बल सीधे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के प्रशासनिक दायरे में आता है, लेकिन इसका प्रशिक्षण और युद्धक क्षमताएं सेना के स्पेशल फोर्सेज के समकक्ष होती हैं:
गुरिल्ला और जंगल युद्ध: इस बल के कमांडो घने जंगलों, नदियों, नालों और दलदली इलाकों में कई-कई हफ्तों तक शून्य रसद पर जीवित रहकर घात लगाने (एंबुश) और नक्सलियों के अड्डों को तबाह करने में पारंगत होते हैं।
विशेष प्रशिक्षण: मिजोरम और मध्य प्रदेश के दुर्गम इलाकों में चलने वाले कठोर प्रशिक्षण के बाद ही जवानों को कोबरा की पहचान 'कैमूफ्लाज वर्दी' और विशेष बैज दिया जाता है।
अग्रिम मोर्चे की तैनाती: छत्तीसगढ़ के बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा और झारखंड-ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाले सबसे जोखिम भरे अभियानों में कोबरा कमांडो सबसे आगे रहते हैं।
ऐसे अत्यंत तनावपूर्ण और सीधे जीवन-मरण के संघर्ष वाले विशेष बल का नेतृत्व संभालना किसी भी सैन्य या पुलिस अधिकारी के लिए सर्वोच्च पेशेवर चुनौती माना जाता है।
असम के जंगलों से उग्रवादियों के खात्मे तक: संजुक्ता का बेखौफ सफर
संजुक्ता पराशर का पुलिस करियर साहस और असाधारण फील्ड ऑपरेशंस की मिसालों से भरा रहा है। सिविल सेवा परीक्षा में 85वीं रैंक हासिल करने के बाद उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) का चयन किया। असम में तैनाती के दौरान उन्होंने उग्रवादी संगठनों के खिलाफ ऐसा रुख अपनाया, जिसने उन्हें देश भर में चर्चा में ला दिया।
वर्ष 2015 के आसपास जब असम का कार्बी आंगलोंग और बोडोलैंड क्षेत्र एनडीएफबी (एस) और अन्य विद्रोही गुटों की हिंसक गतिविधियों से जल रहा था, तब संजुक्ता पराशर ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) के रूप में स्वयं एके-47 राइफल लेकर घने जंगलों में कॉम्बिंग ऑपरेशनों की अगुवाई की थी।
उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने मात्र 15 महीनों के भीतर 16 से अधिक दुर्दांत उग्रवादियों को मुठभेड़ों में ढेर किया, 60 से ज्यादा सक्रिय आतंकियों को जिंदा गिरफ्तार किया और हथियारों का विशाल जखीरा बरामद किया था। उग्रवादियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमलों का उन्होंने जिस निडरता से सामना किया, उसी के बाद असम की स्थानीय जनता ने उन्हें 'आयरन लेडी' की उपाधि दी थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) में भी साबित की अपनी कानूनी और तकनीकी धार
संजुक्ता पराशर केवल जंगलों की छापामार कार्रवाई तक ही सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने देश की सर्वोच्च आतंकवाद-रोधी एजेंसी 'एनआईए' (National Investigation Agency) में भी लंबे समय तक पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) के पद पर सेवा दी।
एनआईए में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई संवेदनशील राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों की कड़ियां जोड़ीं:
कश्मीर घाटी में आतंकी वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) नेटवर्क की गहराई से जांच और साजिशकर्ताओं की धरपकड़।
पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में सक्रिय विभिन्न प्रतिबंधित संगठनों के डिजिटल मॉड्यूल्स और विदेशी फंडिंग रूट्स को बेनकाब करना।
अदालतों में आतंकवाद से जुड़े मामलों की ठोस केस डायरी और चार्जशीट तैयार कर अभियुक्तों को कठोर सजा दिलाना।
जमीनी जंग और उच्च स्तरीय जांच दोनों क्षेत्रों में उनके इस असाधारण संतुलन ने उन्हें गृह मंत्रालय की नजर में शीर्ष कमान संभालने के लिए सबसे योग्य अधिकारी बनाया।
महिला सशक्तिकरण का सबसे जीवंत और प्रेरणादायी उदाहरण
अब तक पारंपरिक रूप से जंगल युद्ध और विशेष कमांडो यूनिट्स की सर्वोच्च कमान को पुरुषों का एकाधिकार माना जाता था। संजुक्ता पराशर की यह नियुक्ति इस रूढ़िवादी सोच पर सीधा और निर्णायक प्रहार है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संजुक्ता पराशर की युद्ध नीति, रणनीतिक स्पष्टता और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता कोबरा बल को नए युग के नक्सल-विरोधी अभियानों में और अधिक आक्रामक व सटीक बनाएगी। देश के सबसे खतरनाक और घातक कमांडो अब एक ऐसी महिला अधिकारी के रणनीतिक आदेशों पर आगे बढ़ेंगे, जिसने अपने पूरे जीवन में अग्रिम मोर्चे से नेतृत्व करना सीखा है।
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