Hardoi News: तीर्थ यात्रियों के लिए खुशखबरी- 55 करोड़ से सुदृढ होगी आस्था की पथरीली डगर। 

अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड एसके मिश्रा ने बताया शासन स्तर से नैमिष तीर्थ क्षेत्र 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण का अनुमोदन दे दिया ...

By INA News Desk
Oct 28, 2024 - 13:56
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Hardoi News: तीर्थ यात्रियों के लिए खुशखबरी- 55 करोड़ से सुदृढ होगी आस्था की पथरीली डगर। 

हरदोई। पुण्य की आस में प्रत्येक वर्ष आस्था की पथरीली डगर पर परिक्रमा करने वाले तीर्थ यात्रियों को अब और कष्ट नहीं उठाने होंगे। पथरीली राहों पर कंकड़ कंकड़ राम का भजन गाकर 84 कोसीय परिक्रमा पूरी करने वाले रामादल अब आसानी से अपनी परिक्रमा पूरी कर सकेंगे। विश्वस्तरीय मानकों के साथ नैमिष कारीडोर के निर्माण के साथ ही शासन स्तर से 84 कोसीय नैमिष तीर्थ क्षेत्र परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण का भी अनुमोदन किया गया है।

अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड एसके मिश्रा ने बताया शासन स्तर से नैमिष तीर्थ क्षेत्र 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण का अनुमोदन दे दिया गया है। धर्मार्थ योजना के अंतर्गत जनपद के परिक्रमा मार्ग के 29.600 किलोमीटर हिस्से के चौड़ीकरण एवं सुदृढीकरण पर 55 करोड़ की धनराशि व्यय की जाएगी।

स्वीकृत धनराशि मिलते ही साढ़े तीन मीटर चौड़े परिक्रमा मार्ग को 5.50 मीटर चौड़ा किया जाएगा। अधिशासी अभियंता ने बताया धर्मार्थ कार्य विभाग से परिक्रमा मार्ग के दूसरे पड़ाव हर्रैया नगवा कोथावां से चौथे पड़ाव गिरधरपुर उमरारी तक के 15 किलोमीटर 300 मीटर मार्ग के निर्माण के लिए 28 करोड़ एवं पांचवे पड़ाव साकिन गोपालपुर से देवगवां तक14 किलोमीटर 300 मीटर के हिस्से के निर्माण के लिए 27 करोड़ का इस्टीमेट शासन को भेजा गया है।

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  • प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु करते हैं परिक्रमा

पुराणों में वर्णित नैमिष अरण्य गोमती तट पर स्थित है, भगवान राम ने रावण वध के पश्चात अयोध्या वासियों के साथ नैमिष तीर्थ क्षेत्र की 84 कोसी परिक्रमा कर इस तीर्थ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले हत्याहरण तालाब में स्नान कर ब्रह्म हत्या के दोष से मुक्ति पाई थी। महर्षि दधीच ने इस तीर्थ क्षेत्र में ही दधीच कुंड के समक्ष अपनी अस्थियों का दान किया था। नैमिषारण्य में ही भगवान कृष्ण के सुदर्शन चक्र को स्थान मिला था, मां ललिता देवी शक्तिपीठ भी नैमिष क्षेत्र में है। महर्षि पुराण में इस स्थान का उल्लेख 88 हजार ऋषियों की तपस्थली के रूप में आया है।

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