Saharanpur News: पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी, जिलेभर के पत्रकारों की बैठक बुलाई
सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लखनऊ तक संघर्ष की रणनीति, धरना-प्रदर्शन से आमरण अनशन तक की तैयारी
- पत्रकार उत्पीड़न के खिलाफ बड़े आंदोलन की तैयारी
- ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा ने बुलाई जिलेभर के पत्रकारों की बैठक
- सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लखनऊ तक संघर्ष की तैयारी, धरना-प्रदर्शन से लेकर आमरण अनशन तक की रूपरेखा
सहारनपुर। पत्रकार उत्पीड़न के लगातार सामने आ रहे मामलों को लेकर जिले के पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। पत्रकारों के सम्मान,सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए अब बड़े आंदोलन की तैयारी शुरू हो गई है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा ने जिलेभर के पत्रकारों की बैठक बुलाई है, जिसमें आंदोलन की विस्तृत रणनीति पर मंथन किया जाएगा।
आलोक तनेजा ने कहा कि जिले में पत्रकार उत्पीड़न के कई मामले सामने आ रहे हैं। उनका कहना है कि शासनादेश के क्रम में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय पत्रकार स्थायी समिति की बैठक में भी पत्रकार उत्पीड़न के मामलों पर चिंता जताई गई थी। बैठक में यह तय किया गया था कि किसी भी पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से पहले राजपत्रित अधिकारी से जांच कराई जाएगी।
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन का आरोप है कि इसके बावजूद पीटीआई के संवाददाता एवं वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल तथा न्यूज़ परिक्रमा के संवाददाता उस्मान के खिलाफ अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज किए गए। एसोसिएशन ने इन मामलों को पत्रकारों के सम्मान और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए संघर्ष का फैसला किया है।
आंदोलन की रणनीति तैयार करने के लिए जिलाध्यक्ष आलोक तनेजा ने एक समिति का गठन किया है। समिति में पत्रकार नवाजिश खान,वेद प्रकाश पांडे,संजय चौधरी,विनोद कश्यप, डॉ.दानिश खान (अम्बेहटा),शराफ़त मिर्ज़ा (तीतरो), अरविंदर सिंह काका (नानोता),चौधरी कुशल पाल (रामपुर मनिहारन),एस.एम. हुसैन जैदी (बेहट), सुनील जायसवाल (बिहारीगढ़),शक्ति चौधरी (सरसावा) और अफजल खान (गंगोह) को शामिल किया गया है।
समिति को सात दिनों के भीतर आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद जनपद से मंडल और मंडल से लखनऊ तक पत्रकारों की आवाज बुलंद करने की तैयारी है। उच्च अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन सौंपने के साथ ही धरना-प्रदर्शन और आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन तक का निर्णय लिया जा सकता है।
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