Hardoi: विश्व स्तनपान सप्ताह पर जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में

Aug 1, 2026 - 17:55
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Hardoi: विश्व स्तनपान सप्ताह पर जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित
विश्व स्तनपान सप्ताह पर जिला महिला अस्पताल में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित

हरदोई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशों के क्रम में शनिवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदोई के तत्वावधान में जिला महिला अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व, मानसिक रोग एवं बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों तथा नशीले पदार्थों के दुरुपयोग से बचाव के विषय में विस्तृत जानकारी दी गई।

यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश रीता कौशिक तथा सिविल जज (सीनियर डिवीजन)/प्रभारी सचिव स्मिता गोस्वामी के निर्देशानुसार, तहसील विधिक सेवा समिति सदर के सचिव/तहसीलदार सचिंद्र कुमार शुक्ला के निर्देशन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला महिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुबोध सिंह ने की।

डॉ. सुबोध सिंह ने बताया कि 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाने का उद्देश्य माताओं एवं समाज को नवजात शिशुओं के लिए स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि जन्म के पहले एक घंटे के भीतर शिशु को माँ का दूध पिलाना शुरू करना चाहिए तथा प्रारंभिक पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

परिवार नियोजन काउंसलर गरिमा शुक्ला ने बताया कि जन्म के बाद पहले छह माह तक शिशु को केवल माँ का दूध ही दिया जाना चाहिए। उन्होंने स्तनपान से होने वाले स्वास्थ्य लाभों, जैसे दस्त, निमोनिया एवं कुपोषण से बचाव, तथा माताओं में स्तन कैंसर, अंडाशय के कैंसर एवं प्रसवोत्तर स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होने की जानकारी दी। साथ ही गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार अपनाने पर भी जोर दिया।

शिविर में लीगल एड क्लीनिक के श्यामू सिंह ने मानसिक रोग एवं बौद्धिक अक्षमताओं से ग्रस्त व्यक्तियों के कानूनी अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे व्यक्तियों को भी समाज में सम्मानपूर्वक और समान अधिकारों के साथ जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 39A तथा दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के तहत उन्हें समान अवसर, उचित स्वास्थ्य सेवाएं एवं निःशुल्क विधिक सहायता का अधिकार प्राप्त है।

इस दौरान नशीले पदार्थों, शराब एवं तंबाकू के दुरुपयोग से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए लोगों से इनसे दूर रहने की अपील की गई। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सहायता के लिए टोल फ्री नंबर 15100 की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम में अस्पताल स्टाफ एवं बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता की।

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