सम्भल की सियासत में बड़ा उलटफेर! जामा मस्जिद के सदर जफर अली AIMIM में शामिल, सपा की बढ़ी मुश्किलें
सम्भल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। शाही जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) का दामन थाम लिया है। पार्टी की आयोजित बैठक में उन्होंने औपचारिक रूप से AIMIM की सदस्यता ग्रहण की। जफर अली पहले ही आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं, ऐसे में AIMIM में उनकी एंट्री को सम्भल की चुनावी राजनीति का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
जफर अली के AIMIM में शामिल होने के बाद सम्भल विधानसभा का सियासी मुकाबला और दिलचस्प होने के संकेत मिल रहे हैं। माना जा रहा है कि उनकी मौजूदगी से समाजवादी पार्टी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। खासतौर पर सपा विधायक नवाब इकबाल महमूद के लिए यह नया राजनीतिक समीकरण चुनौती बन सकता है। AIMIM पहले भी सम्भल की स्थानीय राजनीति में अपनी ताकत दिखा चुकी है। नगर पालिका चुनाव में पार्टी ने सपा को करारी शिकस्त देते हुए नवाब इकबाल महमूद की पत्नी को लगभग 40 हजार वोटों से हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। अब जफर अली जैसे प्रभावशाली चेहरे के पार्टी से जुड़ने के बाद AIMIM अपने जनाधार को और मजबूत करने की कोशिश में जुट गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जफर अली विधानसभा चुनाव मैदान में उतरते हैं तो सम्भल में मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जिससे चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। फिलहाल उनकी AIMIM में एंट्री ने जिले की सियासत का पारा चढ़ा दिया है और सभी राजनीतिक दलों की नजर अब सम्भल के बदलते चुनावी समीकरणों पर टिक गई है।
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