Sambhal: वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों की एंट्री पर मौलाना वसी अशरफ का विरोध, बोले- मुसलमानों का विकास रुकेगा
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले पर मौलाना वसी अशरफ ने आपत्ति जताई
उवैस दानिश, सम्भल
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वक्फ बोर्ड में हिंदू सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले पर मौलाना वसी अशरफ ने आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि हर नागरिक को संविधान के दायरे में अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन वक्फ बोर्ड का गठन अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक और वक्फ मामलों के प्रबंधन के लिए किया गया था, इसलिए इसमें मुस्लिम सदस्यों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
मौलाना वसी अशरफ ने कहा कि देश में मुसलमान पहले से ही सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग में हैं। ऐसे में वक्फ बोर्ड जैसी संस्थाओं में मुस्लिम प्रतिनिधित्व कम होने से रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे और इसका सीधा असर मुस्लिम परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। हिंदू सदस्यों की नियुक्ति के प्रभाव पर उन्होंने कहा कि यदि नियुक्त सदस्य शिक्षित और नियम-कानून की समझ रखने वाले होंगे तो वक्फ की संपत्तियों, मस्जिदों, मदरसों और कब्रिस्तानों के संचालन पर कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि संबंधित लोगों को वक्फ और उसके नियमों की जानकारी नहीं होगी, तो भविष्य में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। मौलाना ने केंद्र सरकार के "सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास" के नारे का हवाला देते हुए कहा कि यह फैसला उस भावना के अनुरूप नहीं दिखता। उनके अनुसार, यदि वक्फ बोर्ड में मुस्लिम प्रतिनिधित्व घटता है तो इससे मुसलमानों के विकास की प्रक्रिया प्रभावित होगी। उन्होंने मांग की कि वक्फ बोर्ड की मूल भावना को बनाए रखते हुए उसमें मुस्लिम समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
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