NEET UG 2026 Karnataka HC - OMR शीट में गड़बड़ी का झूठा दावा पड़ा भारी, कर्नाटक हाई कोर्ट ने उम्मीदवार पर ठोका ₹1 लाख का जुर्माना

NEET-UG 2026 री-एग्जाम रिजल्ट के बाद OMR शीट में गड़बड़ी का आरोप लगाने वाले उम्मीदवार की याचिका कर्नाटक हाईकोर्ट ने खारिज कर दी और ₹1 लाख का जुर्माना लगाया।

By INA News Desk
Nov 3, 2026 - 15:14
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NEET UG 2026 Karnataka HC - OMR शीट में गड़बड़ी का झूठा दावा पड़ा भारी, कर्नाटक हाई कोर्ट ने उम्मीदवार पर ठोका ₹1 लाख का जुर्माना
प्रतीकात्मक तस्वीर
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  • NTA NEET Legal Cases - NEET-UG री-एग्जाम रिजल्ट के बाद NTA के खिलाफ 100 से ज्यादा याचिकाएं, कोर्ट ने कहा: न्यायिक प्रक्रिया का न करें दुरुपयोग
  • Karnataka High Court On NEET OMR - ओरिजिनल और स्कैन OMR शीट में नहीं मिला कोई अंतर, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर लगाया हर्जाना
  • Medical Entrance Exam News - नीट री-एग्जाम पर अदालतों में याचिकाओं की बाढ़, ओएमआर में हेरफेर का फर्जी आरोप लगाने पर सख्त सजा

मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के पुन: परीक्षा (री-एग्जाम) परिणाम घोषित होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को कानूनी मोर्चों पर भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में नतीजों, अंक गणना और ओएमआर शीट को लेकर 100 से अधिक याचिकाएं दाखिल की गई हैं। हालांकि, इन कानूनी लड़ाइयों के बीच कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसला सुनाते हुए झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाने वाले याचिकाकर्ता उम्मीदवार पर एक लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है।

याचिकाकर्ता छात्र ने अपनी अर्जी में दावा किया था कि NTA द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई उसकी स्कैन की गई OMR आंसर शीट में हेरफेर किया गया है और वास्तविक अंकों की तुलना में उसे गलत अंक दिए गए हैं।

  • ओरिजिनल और स्कैन कॉपी में नहीं मिला कोई अंतर

कर्नाटक हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को छात्र की मूल (ओरिजिनल) OMR शीट और सिस्टम में स्कैन की गई प्रति को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। जब पीठ ने दोनों प्रतियों का भौतिक व तकनीकी मिलान किया, तो पाया कि दोनों दस्तावेजों में रत्ती भर भी भिन्नता नहीं थी। छात्र द्वारा ओएमआर शीट के बबल्स भरने और स्कैन की गई शीट के डेटा में पूर्ण समानता पाई गई।

मूल रिकॉर्ड्स में आरोपों की पुष्टि न होने पर अदालत ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस आधार के केवल कम अंक आने की हताशा में जांच एजेंसियों और राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर गंभीर आक्षेप लगाना न्यायपालिका के समय की बर्बादी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी प्रक्रियाओं और जनहित के मंचों का व्यक्तिगत फायदे या झूठे नैरेटिव गढ़ने के लिए दुरुपयोग नहीं होने दिया जा सकता।

  • देश भर की अदालतों में लंबित हैं 100 से अधिक याचिकाएं

NEET-UG 2026 री-एग्जाम के परिणाम सामने आने के बाद देश भर के विभिन्न उच्च न्यायालयों जैसे दिल्ली, राजस्थान, इलाहाबाद, पंजाब एवं हरियाणा और बॉम्बे हाई कोर्ट में परीक्षार्थियों द्वारा 100 से अधिक याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया, समय के नुकसान के बदले दिए गए ग्रेस मार्क्स और आंसर-की विसंगतियों को चुनौती दी गई है।

अदालतें अलग-अलग मामलों के तथ्यों के आधार पर इन याचिकाओं की सुनवाई कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय के इस सख्त आदेश के बाद उन उम्मीदवारों और पक्षों पर अंकुश लगेगा जो बिना पुख्ता तकनीकी प्रमाणों के केवल कयासों के आधार पर अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।

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