Sitapur: बारिश के बाद जलमग्न हुआ नैमिषारण्य का बाईपास मार्ग श्रद्धालुओं और स्कूली बच्चों की बढ़ी परेशानी
रात में हुई बारिश ने नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद तीर्थ क्षेत्र
रिपोर्ट: सुरेंद्र मोठी, नैमिषारण्य
नैमिषारण्य। रात में हुई बारिश ने नैमिषारण्य तीर्थ क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। बारिश के बाद तीर्थ क्षेत्र के मुख्य मार्गों पर जगह-जगह जलभराव और कीचड़ फैल गया, जिससे लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया। स्कूली बच्चे, स्थानीय नागरिक, श्रद्धालु और कांवड़िये गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरने को मजबूर दिखाई दिए। सुबह स्कूल जाने वाले बच्चों को जलभराव वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ा। वहीं दूर-दराज से नैमिषारण्य पहुंचे श्रद्धालुओं और कांवड़ियों को भी इसी परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़कों पर जमा बारिश का पानी और कीचड़ तीर्थ की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जल निकासी और साफ-सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में ही मुख्य मार्ग जलमग्न हो जाते हैं। ऐसे में लोगों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नैमिष धाम के प्रमुख मार्गों पर जल निकासी के लिए व्यवस्थित नालों का निर्माण कराया जाना बेहद जरूरी है, ताकि बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से निजात मिल सके।
- बाईपास मार्ग पर घरों और दुकानों में घुसा पानी
इसी बीच नैमिषारण्य तीर्थ के बाईपास मार्ग पर भी बारिश का असर देखने को मिला। यहां सड़क किनारे रहने वाले लोगों के घरों और दुकानों में बारिश का पानी घुस गया। बाईपास मार्ग निवासी अमित गुप्ता ने बताया कि देर रात हुई बारिश के कारण उनके घर और दुकान में पानी भर गया। हालांकि फिलहाल बारिश के गंदे पानी से किसी तरह के बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। वहीं पास में रहने वाले सुरेंद्र ने कहा कि जल निकासी की समस्या का प्रशासन को तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय रहते स्थायी समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में बारिश के दौरान बड़ा नुकसान हो सकता है। उन्होंने बाईपास मार्ग पर नाला निर्माण कराकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था किए जाने की मांग की।
- जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल
नैमिषारण्य जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक तीर्थ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का आवागमन होता है। ऐसे में बारिश के बाद मुख्य मार्गों का जलमग्न होना और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों का गंदे पानी से गुजरना व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश के मौसम में जलभराव की समस्या पहले से सामने आती रही है, तो समय रहते जल निकासी की स्थायी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलभराव वाले मार्गों से तत्काल पानी निकलवाया जाए, कीचड़ और गंदगी की सफाई कराई जाए तथा भविष्य की समस्या से बचने के लिए नैमिष धाम के मुख्य मार्गों और बाईपास पर नाला निर्माण की ठोस योजना तैयार की जाए।
- बड़ा सवाल श्रद्धालुओं की सुविधा और तीर्थ की व्यवस्था को लेकर जिम्मेदार अधिकारी कब जागेंगे?
बारिश में जलमग्न होते मुख्य मार्ग, गंदे पानी से गुजरते श्रद्धालु और कांवड़िये तथा घरों-दुकानों में घुसता बारिश का पानी जिम्मेदार विभागों की जल निकासी व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस समस्या का अस्थायी समाधान करता है या फिर नैमिषारण्य को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाने के लिए नाला निर्माण जैसी ठोस पहल करता है।
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