Ballia News: पूर्वांचल के गांधी रामगोविंद चौधरी को नम आंखों से अंतिम विदाई, सरयू तट पर पंचतत्व में विलीन हुए
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'पूर्वांचल के गांधी' के नाम से चर्चित, आठ बार के विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी
Report - Syed Asif Hussain Zaidi
सिकंदरपुर (बलिया)। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 'पूर्वांचल के गांधी' के नाम से चर्चित, आठ बार के विधायक और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी को रविवार को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। उनके पैतृक गांव गोसाईंपुर (सिकंदरपुर) में सरयू नदी के तट पर उनके इकलौते पुत्र रंजीत चौधरी ने मुखाग्नि देकर अंतिम संस्कार की रस्में पूरी कीं। उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
72 वर्षीय रामगोविंद चौधरी का 25 सितंबर 2026 को लखनऊ के SGPGI में निधन हो गया था। निधन की खबर मिलते ही शनिवार रात से ही उनके पैतृक आवास पर लोगों का हुजूम उमड़ने लगा था।
रविवार को उनकी अंतिम यात्रा में हजारों की संख्या में समर्थक, ग्रामीण और कार्यकर्ता शामिल हुए। जनसैलाब के बीच "चौधरी साहब अमर रहें" के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए पक्ष-विपक्ष के दिग्गज पहुंचे। पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सिंह, अंबिका चौधरी, सपा सांसद रमाशंकर राजभर विद्यार्थी, पूर्व मंत्री राजधारी सिंह, दुर्गा प्रसाद यादव, नीरज सिंह गुड्डू समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और सर्वदलीय नेताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
- जेपी आंदोलन से नेता प्रतिपक्ष तक का सफर
रामगोविंद चौधरी का राजनीतिक सफर 1970 के दशक में छात्र राजनीति और लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से शुरू हुआ। आपातकाल के दौरान उन्होंने करीब 19 महीने जेल में बिताए। 1977 में चिलकहर से पहली बार विधायक बनने के बाद वह कुल आठ बार विधानसभा पहुंचे। उन्होंने मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की सरकारों में उद्यान, बेसिक शिक्षा, बाल विकास एवं पुष्टाहार, समाज कल्याण और पंचायती राज जैसे प्रमुख मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। वर्ष 2017 से 2022 तक उन्होंने यूपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई।
- छात्र जीवन से कानून की डिग्री तक
ग्रामीण परिवेश से निकलकर प्रदेश की राजनीति में मुकाम हासिल करने वाले स्व. चौधरी ने स्नातक की पढ़ाई टीडी कॉलेज, बलिया से पूरी की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की और कुछ समय तक वकालत भी की। अपनी सादगी, जमीनी पकड़ और समाजवादी विचारधारा के कारण ही वह जन-जन में लोकप्रिय रहे।
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