Saharanpur Collectorate Mosque Demolition: सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद पर चला बुलडोजर, जिला अदालत का आया आदेश
Saharanpur News: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में अवैध घोषित मस्जिद पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया। कोर्ट के आदेश के बाद हुई इस कार्रवाई के बाद सुरक्षा सख्त है।
- Saharanpur News: जिला जज कोर्ट के आदेश के बाद सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद ध्वस्त, शहर में भारी पुलिस बल तैनात
- सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में कोर्ट के आदेश पर चला बुलडोजर, अवैध निर्माण ध्वस्त; अफवाहों के बीच शहर में भारी पुलिस फोर्स तैनात
- Saharanpur Collectorate Demolition: सहारनपुर कलेक्ट्रेट में बनी मस्जिद ध्वस्त, जिला अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को जिला जज न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई के तहत शनिवार तड़के बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया गया है। कोर्ट द्वारा निर्माण को अवैध ठहराए जाने और सिटी मजिस्ट्रेट के पुराने फैसले को बरकरार रखने के बाद यह ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया। कार्रवाई के दौरान किसी भी संभावित विरोध या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पूरे कलेक्ट्रेट परिसर और शहर के संवेदनशील इलाकों में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। रात भर सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और स्थानीय सांसद व पार्षदों की प्रतिक्रियाओं के बाद प्रशासन ने बेहद सतर्कता बरतते हुए सुबह-सुबह ही बुलडोजर की मदद से इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
सहारनपुर स्थित कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद के कानूनी विवाद में जिला जज न्यायालय की ओर से अंतिम फैसला आने के बाद शनिवार सुबह प्रशासनिक अमले ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। अदालत द्वारा इस ढांचे को अनाधिकृत घोषित किए जाने के बाद सुबह छह बुलडोजर की मदद से निर्माण को हटा दिया गया। इस दौरान जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण ढंग से पूरा कराने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और कलेक्ट्रेट परिसर को चारों तरफ से सील कर दिया गया था।
इस विवाद की कानूनी शुरुआत मार्च 2025 में हुई थी, जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कलेक्ट्रेट परिसर में बनी इस मस्जिद को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रशासनिक परिसर में बना यह निर्माण पूरी तरह से अवैध है और इसका व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी उपयोग किया जा रहा है, जिससे कलेक्ट्रेट की सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है।
यह मामला पिछले डेढ़ साल से सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में विचाराधीन था। जुलाई में सुनवाई पूरी करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने निर्माण को अवैध माना था और इसे हटाने के निर्देश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने जिला जज न्यायालय में अपील दायर की थी। हालांकि, जिला अदालत ने मामले की समीक्षा करने के बाद तीन दिन पहले दिए गए अपने फैसले में सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को पूरी तरह सही ठहराया।
न्यायालय का फैसला सामने आने के बाद शुक्रवार रात से ही शहर में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगी थीं। स्थिति को देखते हुए स्थानीय सांसद इमरान मसूद और कई पार्षदों ने इंटरनेट मीडिया पर आकर अपनी बातें रखीं और शांति बनाए रखने या अपना पक्ष प्रस्तुत करने की बात कही। इसके बावजूद, प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए शनिवार तड़के ही भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी।
कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह पूरा कदम निष्पक्ष रूप से न्यायालय के आदेशों का अनुपालन करने के लिए उठाया गया है। पुलिस प्रशासन ने नागरिकों से किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने और शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर नजर रखने के लिए साइबर सेल को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।
दूसरी तरफ, शिकायतकर्ता विकास त्यागी ने कोर्ट के इस फैसले और प्रशासनिक कार्रवाई का स्वागत किया है। उन्होंने इसे कानून और न्याय की जीत बताते हुए कहा कि प्रशासनिक परिसरों की सुरक्षा सर्वोपरि है। वहीं, सांसद इमरान मसूद और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने इस मुद्दे पर कानूनी दायरे में रहकर अपनी बात रखी थी और वे शहर में किसी भी कीमत पर सामाजिक सौहार्द बिगड़ने नहीं देना चाहते।
इस प्रशासनिक कार्रवाई का सीधा असर शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर, कचहरी मार्ग और आसपास के प्रमुख चौराहों पर पुलिस बैरिकेडिंग लगा दी गई है। एहतियात के तौर पर पीएसी और पुलिस की अतिरिक्त कंपनियों को तैनात किया गया है।
इंटरनेट मीडिया पर चल रही बयानबाजी और अफवाहों को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। आम लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करते हुए कलेक्ट्रेट के सामान्य कामकाज को सुरक्षा घेरे में संचालित किया जा रहा है, ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, कलेक्ट्रेट परिसर से मलबे को हटाने का काम पूरा किया जा रहा है और उक्त स्थान को सुरक्षित कर दिया गया है। आने वाले कुछ दिनों तक संवेदनशील इलाकों में पुलिस गश्त जारी रहेगी ताकि शांति व्यवस्था बनी रहे।
कानूनी स्तर पर यदि संबंधित पक्ष उच्च न्यायालय का रुख करता है, तो उस पर आगे की विधिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल, जिला प्रशासन का पूरा ध्यान शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार के अनर्गल प्रचार को रोकने पर केंद्रित है।
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