सम्भल के हरिधाम बांध ट्रस्ट में ‘फर्जीवाड़े’ का आरोप, दस्तावेजों से लेकर दान और खेती की कमाई तक पर उठे सवाल
सम्भल के प्रसिद्ध हरिधाम बांध धाम ट्रस्ट में फर्जी दस्तावेजों और दान की रकम में हेराफेरी के आरोप। डीएम ने तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की।
सम्भल। जनपद के गवां क्षेत्र स्थित आस्था के प्रमुख केंद्र संत हरिमहाराज हरिधाम बांध धाम आश्रम से जुड़े प्रबंधन ट्रस्ट में गंभीर अनियमितताओं और फर्जीवाड़े के आरोपों को लेकर बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा हो गया है।
आश्रम ट्रस्ट से जुड़े दस सदस्यों ने संचालन तंत्र पर कूटरचित कागजात के आधार पर नई कार्यकारिणी गठित करने, नवीनीकरण कराने और मंदिर में आने वाले चढ़ावे व कृषि भूमि से होने वाली लाखों रुपये की आय में हेराफेरी करने के संगीन आरोप लगाए हैं।
इस संवेदनशील मामले में शिकायत मिलने के उपरांत जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तीन प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित कर विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हरिधाम बांध धाम परिसर में संत हरिमहाराज का विशाल मंदिर स्थापित है और आश्रम ट्रस्ट के स्वामित्व में लगभग तीन सौ बीघा कृषि योग्य भूमि है, जहां प्रतिवर्ष गन्ना, गेहूं व अन्य फसलों की व्यापक स्तर पर खेती की जाती है।
आरोप है कि वर्तमान प्रबंधन ने ट्रस्ट के नवीनीकरण और पुनर्गठन के दौरान पहचान पत्रों, शपथपत्रों और निवास प्रमाणपत्रों में हेरफेर कर अपात्र व बाहरी लोगों को मिलीभगत से सदस्य बना लिया।
इसके अलावा कृषि भूमि से उत्पादित फसल और गन्ने की आपूर्ति से प्राप्त होने वाली सरकारी मिल की भुगतान राशि को ट्रस्ट के अधिकृत खाते में न भेजकर कुछ चहेते सदस्यों के निजी खातों में स्थानांतरित कराकर बंदरबांट की गई। श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में अर्पित की जाने वाली नकद दान राशि के रिकॉर्ड में भी भारी विसंगतियों के आरोप लगाए गए हैं।
प्रबंधन में कथित रूप से भूमाफिया और प्रभावशाली बाहरी व्यक्तियों को गैरकानूनी ढंग से शामिल करने की शिकायत सहायक निबंधक फर्म्स सोसाइटीज एवं चिट्स तथा जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से शासन स्तर पर दर्ज कराई गई थी। जिलाधिकारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल के लिए नगर मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी चंदौसी और अधिशासी अधिकारी बहजोई की संयुक्त समिति को जांच सौंपी है।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समिति की विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त होते ही तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। दूसरी ओर ट्रस्ट के मंत्री ने नगर से बाहर होने की बात कहते हुए वापस आकर पक्ष रखने की बात कही है, जबकि ट्रस्ट से जुड़े सुपरवाइजर ने शिकायतकर्ताओं पर ही संस्था की रकम बकाया होने का दावा करते हुए आरोपों को निराधार बताया है।
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