सम्भल में मुफ़्ती अजमल शाह के 65वें उर्स पर उमड़ा अकीदत का सैलाब, इल्मी विरासत को संजोने का संकल्प
सम्भल के मदरसा अजमल उलूम में मुफ़्ती मोहम्मद अजमल शाह का 65वां उर्स मनाया गया। इस दौरान उनकी इल्मी विरासत पर चर्चा हुई और नई किताब का विमोचन किया गया।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उलूम में इदारे के संस्थापक हज़रत अल्लामा मुफ़्ती मोहम्मद अजमल शाह कादरी अशफ़ी रिज़वी नईमी रहमतुल्लाह अलैह का 65वां उर्स अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस मौके पर उलमा-ए-किराम ने उनकी इल्मी और दीनी सेवाओं को याद किया। कार्यक्रम के दौरान मनकबतें पेश की गईं और उनकी जिंदगी व इल्मी विरासत पर रोशनी डाली गई।

उर्स के मौके पर मौलाना कलीम अशरफ ने बताया कि मुफ़्ती अजमल शाह की सबसे अहम इल्मी सेवाओं में उनके फतावे शामिल हैं। ‘फतावा-ए-अजमलिया’ को जल्द ही 10 जिल्दों में प्रकाशित करने की तैयारी है। इसके अलावा उनकी लगभग 22 किताबें भी सामने आ चुकी हैं। कार्यक्रम में एक और अहम उपलब्धि के तौर पर ‘खुत्बात-ए-अजमली’ किताब का विमोचन किया गया।

इस किताब में मौलाना कारी मोहम्मद अलाउद्दीन अजमली के 26 खुत्बे शामिल हैं। मौलाना कलीम अशरफ के मुताबिक, मुफ़्ती अजमल शाह से अकीदत और मोहब्बत के चलते इस किताब को उनके नाम से मंसूब किया गया है।

मौलाना कलीम अशरफ ने मुफ़्ती अजमल शाह के उस चर्चित फतवे का भी जिक्र किया, जो वर्ष 1950 में हज के लिए फोटो की अनुमति से संबंधित सवाल पर दिया गया था। उनके मुताबिक, सरकारी पाबंदी के दौर में हज-ए-फर्ज के लिए फोटो की अनुमति पर दिया गया यह फतवा खास पहचान रखता है।

वहीं, मौलाना तंजीम अशरफ ने बताया कि उर्स से पहले 10 अक्टूबर को 16वां अजमल उलमा सेमिनार आयोजित किया गया था। इसमें विद्वानों ने मुफ़्ती अजमल शाह की शख्सियत, हालात और तस्नीफात पर अपने मकाले पेश किए। 11 अक्टूबर को दोपहर 12:20 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।

कार्यक्रम में सम्भल और आसपास के इलाकों से पहुंचे उलमा, शायरों और अकीदतमंदों ने शिरकत की। उर्स के जरिए मुफ़्ती अजमल शाह की इल्मी विरासत और उनकी सेवाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया गया।
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