Sawan 2026: हरदोई के इन प्रसिद्ध शिवालयों में उमड़ती है भारी भीड़, जानें सकाहा से लेकर मल्लावां तक के पौराणिक शिव धामों का इतिहास
सावन के महीने में हरदोई के प्राचीन शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। सकाहा के संकट हरण महादेव से लेकर मल्लावां के सुनासीर नाथ तक, जानिए इन प्रसिद्ध शिवालयों की पौराणिक कथाएं और धार्मिक महत्व।
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पवित्र सावन मास की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में धार्मिक उत्साह चरम पर पहुंच गया है। जिलेभर के ऐतिहासिक और पौराणिक शिव मंदिरों में तड़के से ही शिवभक्तों और कांवड़ियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। मुख्य रूप से सकाहा स्थित शिव संकट हरण महादेव, मल्लावां के सुनासीर नाथ और पिहानी क्षेत्र के प्राचीन शिवालयों में श्रद्धालु गंगाजल से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भव्य मेलों का आयोजन होता है, जहाँ दूर-दराज से आने वाले भक्त मनोकामना पूर्ति की कामना के साथ दर्शन-पूजन करते हैं।
सावन में हरदोई के शिव धामों में क्यों उमड़ती है भक्तों की भारी भीड़
सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। हरदोई जिले में कई ऐसे प्राचीन और पौराणिक शिवालय स्थित हैं, जिनका संबंध वैदिक काल से लेकर महाभारत काल तक से जोड़ा जाता है। सावन के दौरान गंगा घाटों से जल लेकर लौटने वाले कांवड़िये इन्हीं प्रमुख मंदिरों में पहुंचकर भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं। जिले के सकाहा, मल्लावां और पिहानी के मंदिरों में सावन के महीने में सुरक्षा और व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए जाते हैं। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह पूरा क्षेत्र सावन माह में 'शिवमय' हो जाता है और पूरा वातावरण बम-बम भोले के जयकारों से गुंजायमान रहता है।
सकाहा से लेकर मल्लावां तक: जानिए मुख्य शिव धामों की पौराणिक कथाएं
हरदोई जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर सकाहा गांव में स्थित शिव संकट हरण महादेव मंदिर जिले का सबसे प्रमुख सावन स्थल माना जाता है। मान्यता है कि यहाँ शिवलिंग के दर्शन मात्र से भक्तों के समस्त कष्ट दूर हो जाते हैं। वहीं मल्लावां क्षेत्र में स्थित बाबा सुनासीर नाथ मंदिर के बारे में पौराणिक किंवदंती है कि इसकी स्थापना स्वयं देवराज इंद्र ने की थी। इतिहास और जनश्रुतियों के अनुसार मुगल काल में इस शिवलिंग को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया था, जिसके निशान आज भी शिवलिंग पर दिखाई देते हैं। इसी क्षेत्र में शारदा नहर के तट पर स्थित कपिलेश्वर महादेव मंदिर कपिल मुनि की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। इन पौराणिक मान्यताओं के कारण ही मल्लावां क्षेत्र को स्थानीय लोग बड़े आदर से 'छोटी काशी' भी कहते हैं।
पिहानी का 300 वर्ष पुराना ऐतिहासिक शिवालय
पिहानी कस्बे में सावन के महीने में शिवभक्ति का विशेष संगम देखने को मिलता है। यहाँ का भूरेश्वर महादेव मंदिर, बाबा मंशा नाथ मंदिर और लक्कड़ नाथ मंदिर स्थानीय लोगों की आस्था के बड़े केंद्र हैं। इसके अतिरिक्त पिहानी स्थित गायत्री प्रज्ञा पीठ परिसर का शिवालय भी आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। लगभग 300 वर्ष पुराना यह शिवालय अपने शांत और आध्यात्मिक वातावरण के लिए जाना जाता है। सावन के दौरान यहाँ विशेष अनुष्ठान और महामृत्युंजय जाप का आयोजन किया जाता है, जिसमें आसपास के कई गाँवों से श्रद्धालु सहभागिता करते हैं।
स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाएं और मेले जैसा माहौल
सावन के प्रत्येक सोमवार को हरदोई के इन सभी प्रमुख मंदिरों के आसपास मेले जैसा माहौल रहता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा बैरिकेडिंग, पेयजल, स्वास्थ्य शिविर और स्वच्छता की विशेष व्यवस्था की जाती है। बड़ी संख्या में आने वाले कांवड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भारी वाहनों के मार्ग में बदलाव भी किया जाता है। स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के लिए भी सावन का यह महीना आर्थिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होता है।
सावन में शिव दर्शन के लिए कैसे पहुँचें हरदोई
हरदोई सड़क और रेल मार्ग से राज्य के सभी प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जिला मुख्यालय पहुँचने के बाद श्रद्धालु स्थानीय बसों, ऑटो या निजी वाहनों के माध्यम से सकाहा, मल्लावां और पिहानी स्थित मंदिरों तक आसानी से पहुँच सकते हैं। लखनऊ, कानपुर और सीतापुर से आने वाले भक्तों के लिए भी यहाँ तक पहुँचने के सीधे सड़क मार्ग उपलब्ध हैं। सावन के पावन अवसर पर यदि आप भी आध्यात्मिक शांति और धार्मिक दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो हरदोई के इन प्राचीन शिव धामों की यात्रा एक बेहतरीन विकल्प है।
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