Sitapur News: काशीराम कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, दूषित पानी और गंदगी से जूझ रहे निवासी

सीतापुर स्थित काशीराम कॉलोनी में गंदगी, चोक नालियों और दूषित पेयजल से निवासी परेशान हैं। छह वर्षों से स्वास्थ्य केंद्र बंद है। नगर पालिका ने जांच कराकर समाधान का भरोसा दिया।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 20:45
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Sitapur News: काशीराम कॉलोनी में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, दूषित पानी और गंदगी से जूझ रहे निवासी
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सीतापुर: शहर सीमा से सटी काशीराम कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवार बुनियादी नागरिक सुविधाओं की घोर कमी से जूझ रहे हैं। सफाई व्यवस्था ध्वस्त होने से आवासीय परिसर के चारों ओर गंदगी का जमावड़ा है, वहीं क्षतिग्रस्त नालियों के चलते सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर लगातार जलभराव बना हुआ है। निवासियों का कहना है कि नलों से आने वाले पानी में दुर्गंध और कीड़े निकलने की वजह से वे दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इसके अलावा लंबे समय से बंद पड़े प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जर्जर आंगनबाड़ी भवन ने स्थानीय लोगों की कठिनाइयों को और बढ़ा दिया है।

मामले का संज्ञान लेते हुए सीतापुर नगर पालिका परिषद की प्रभारी अधिशासी अधिकारी (ईओ) एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट सीमा सिंह ने कहा है कि संबंधित तकनीकी व सफाई कर्मचारियों की संयुक्त टीम मौके पर भेजकर वस्तुस्थिति का मुआयना कराया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिया कि निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक नागरिक सेवाओं को दुरुस्त करने का काम प्राथमिकता पर कराया जाएगा।

2008 में बसे थे आवासहीन परिवार, अब रख-रखाव का संकट

कॉलोनी के इतिहास और वर्तमान स्थिति को लेकर स्थानीय निवासी शत्रोहन लाल बताते हैं कि वर्ष 2008 में सरकार की महत्वाकांक्षी काशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत निर्धन, बेसहारा और आवासविहीन परिवारों को यहां पक्के मकान आवंटित कर बसाया गया था। शुरुआती दौर में कॉलोनी में बेहतर जीवन स्तर के लिए चौड़ी सड़कें, व्यवस्थित नालियां, बच्चों के लिए पार्क, नियमित सफाई, सुरक्षित पेयजल और पथ प्रकाश (स्ट्रीट लाइट) की समुचित व्यवस्था की गई थी।

हालांकि, बीते एक दशक में नियमित रख-रखाव के अभाव में पूरी बसावट अव्यवस्था की शिकार हो गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सार्वजनिक पार्कों की चारदीवारी टूट चुकी है और अंदर झाड़ियां उग आई हैं। काशीराम पार्क के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने कीचड़ और मलबे का ढेर लगा रहता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का वहां जाना बंद हो चुका है।

छह साल से बंद पड़ा स्वास्थ्य केंद्र बना कूड़ेदान

कॉलोनी में रहने वाले परिवारों को प्राथमिक चिकित्सा मुहैया कराने के उद्देश्य से आंगनबाड़ी केंद्र के पास एक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की गई थी। स्थानीय निवासियों के मुताबिक यह स्वास्थ्य केंद्र पिछले करीब छह वर्षों से पूरी तरह निष्क्रिय है। यहां न तो कोई चिकित्सक तैनात रहता है और न ही पैरामेडिकल स्टाफ आता है।

लंबे समय तक ताला लटके रहने के कारण इस सरकारी भवन की स्थिति जर्जर हो चुकी है। देखरेख न होने से खाली पड़े परिसर में आसपास का कचरा जमा होने लगा है, जिसके चलते यह भवन अब स्वास्थ्य केंद्र के बजाय कूड़ाघर का रूप ले चुका है। खुले में पड़े कचरे और सड़ांध की वजह से मौसमी बीमारियों, डेंगू, मलेरिया और संक्रामक रोगों का खतरा निरंतर बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस बाबत पूर्व में जिला प्रशासन और जिलाधिकारी को भी लिखित शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया।

आंगनबाड़ी केंद्र भी अव्यवस्था की चपेट में

कॉलोनी में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-2 की स्थिति भी चिंताजनक है। केंद्र की कार्यकत्री रीता के अनुसार, परिसर में नियमित बिजली आपूर्ति न होने से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को काफी परेशानी होती है। केंद्र की छत पर लगा टीन शेड कई जगह से टूट-फूट चुका है, जिससे बरसात के दिनों में पानी सीधे कमरों के भीतर टपकता है।

कमरों में रखी कुर्सियां, मेज और अन्य जरूरी फर्नीचर टूट चुके हैं। इसके अतिरिक्त आंगनबाड़ी केंद्र के सामने पानी की निकासी न होने के कारण हमेशा गंदा पानी भरा रहता है, जिसके बीच से होकर छोटे बच्चों को केंद्र तक पहुंचना पड़ता है।

दूषित पेयजल और राशन व्यवस्था से जुड़ी दिक्कतें

स्थानीय निवासी ऋचा कश्यप ने पेयजल आपूर्ति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि सप्लाई लाइनों से आने वाला पानी कई बार इतना गंदा होता है कि उसमें कीड़े रेंगते दिखाई देते हैं। ऊपर की मंजिलों पर बने फ्लैट्स में वाटर प्रेशर न होने की वजह से पानी चढ़ता ही नहीं, जिससे महिलाओं और बुजुर्गों को भारी बाल्टियां उठाकर सीढ़ियों से ऊपर ले जानी पड़ती हैं।

कॉलोनी की निवासी मोनी किन्नर ने बताया कि नालियां टूटी होने के कारण घरों के बाहर जलजमाव बना रहता है, जिससे दुर्गंध फैलती है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले कॉलोनी के भीतर ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली (राशन) की दुकान थी, जिसे बाद में यहां से हटा दिया गया। अब लोगों को आवश्यक खाद्यान्न लेने के लिए काफी दूर चुंगी इलाके तक पैदल या किराये के वाहन से जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान होता है।

आंदोलन की चेतावनी और प्रशासनिक आश्वासन

नागरिक समस्याओं के समाधान में हो रही देरी को लेकर सामाजिक संगठनों ने भी नाराजगी जताई है। राजा टोडरमल स्मारक समिति राजस्व सुरक्षा सेवादल के राष्ट्रीय संस्थापक अध्यक्ष संजय पुरी ने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते काशीराम आवास की सफाई, जलापूर्ति और स्वास्थ्य सुविधाओं को बहाल नहीं किया, तो जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर को औपचारिक ज्ञापन सौंपकर नागरिक अधिकारों के लिए आवाज उठाई जाएगी।

इधर, नगर पालिका प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नगरीय सीमा और उससे सटी बस्तियों में मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना प्राथमिकता है। प्रभारी ईओ सीमा सिंह के निर्देश के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि सफाई कर्मचारियों का रोस्टर बनाकर नालियों की तलीझाड़ सफाई और पेयजल पाइपलाइन की लीकेज दुरुस्त करने की प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। कॉलोनी के निवासी सीमा देवी, अफसर, राजा राम, शिवम, जय केश, रामपाल सहित कई अन्य नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीन पर काम दिखाई दे।

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