सीतापुर में लंपी वायरस से गोवंश को बचाने की बड़ी मुहिम, गो आश्रय स्थलों में शत-प्रतिशत टीकाकरण के आदेश
सीतापुर के गो आश्रय स्थलों में लंपी स्किन डिजीज से बचाव के लिए सघन टीकाकरण अभियान शुरू। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने शिवथाना केंद्र का स्थलीय निरीक्षण किया।
Report : संदीप चौरसिया, INA NEWS सीतापुर
सीतापुर। जनपद के समस्त गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंश को लंपी स्किन डिजीज के संक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए पशुपालन विभाग ने व्यापक स्तर पर विशेष टीकाकरण महाअभियान प्रारंभ किया है। इस अभियान के तहत सभी गो संरक्षण केंद्रों में रह रहे गोवंश को प्राथमिकता के आधार पर प्रतिरक्षित करने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति परखने के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एमपी सिंह चन्देल ने विकासखंड बिसवां स्थित शिवथाना गो आश्रय स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी बिसवां सहित विभागीय कर्मचारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने केंद्र में संरक्षित मवेशियों के खान-पान, चारे की उपलब्धता, पेयजल, स्वच्छता और चल रहे टीकाकरण कार्य की बिंदुवार समीक्षा की। उन्होंने मौके पर मौजूद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्राम प्रधान को स्पष्ट निर्देश दिए कि केंद्र के एक भी गोवंश का टीकाकरण न छूटे और शत-प्रतिशत आच्छादन तत्काल सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सभी पशुओं के स्वास्थ्य की दैनिक आधार पर कड़ी निगरानी रखने और किसी भी मवेशी में बीमारी का अंदेशा होने पर उसे तुरंत अलग बाड़े में रखकर उपचार शुरू करने को कहा।
पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार लंपी स्किन डिजीज गोवंश में तेजी से फैलने वाला एक संक्रामक विषाणु जनित रोग है। यह मुख्य रूप से मच्छरों, मक्खियों, जूं और खून चूसने वाले परजीवियों के काटने से एक पशु से दूसरे पशु में फैलता है। इस रोग की चपेट में आने पर पशु को तेज बुखार चढ़ता है, त्वचा पर छोटी-बड़ी सख्त गांठें उभर आती हैं, मुंह से लार बहने लगती है, भूख घट जाती है और दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन में अचानक भारी गिरावट दर्ज की जाती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बीमारी पशुओं से इंसानों में नहीं पहुंचती, लेकिन मवेशियों के जीवन और उत्पादकता के लिए अत्यधिक घातक साबित हो सकती है।
विभागीय अधिकारियों ने पशुपालकों, किसानों और गो आश्रय स्थलों के प्रबंधकों से अपील की है कि वे मौसम में बदलाव को देखते हुए अपने मवेशियों का समय रहते टीकाकरण अवश्य कराएं। केंद्रों में दवा का नियमित छिड़काव कराकर मच्छरों व मक्खियों पर प्रभावी रोक लगाई जाए तथा परिसर को पूर्णतः स्वच्छ एवं सूखा रखा जाए। किसी भी पशु में त्वचा पर गांठें या असामान्य कमजोरी दिखने पर तुरंत नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय अथवा क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी से संपर्क कर चिकित्सीय परामर्श लेने की सलाह दी गई है।
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