Sitapur News: कोतवाली गेट पर भावुक हुए राज्यमंत्री राकेश राठौर 'गुरू', अफसरों पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
सीतापुर में अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं की हिरासत के बाद राज्यमंत्री राकेश राठौर 'गुरू' देर रात कोतवाली पहुंचे और प्रशासनिक अनदेखी पर नाराजगी जताई।
- Sitapur News: कोतवाली गेट पर भावुक हुए राज्यमंत्री राकेश राठौर 'गुरू', अफसरों पर कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
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उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में गुरुवार की देर रात एक असामान्य राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया, जब प्रदेश सरकार के नगर विकास राज्यमंत्री राकेश राठौर 'गुरू' सीधे नगर कोतवाली जा पहुंचे। नगर क्षेत्र में चलाए जा रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की सूचना मिलने के बाद मंत्री कोतवाली पहुंचे थे। कोतवाली के मुख्य द्वार पर खड़े होकर उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर खुलकर असंतोष प्रकट किया। बातचीत के दौरान वे बेहद भावुक नजर आए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
राज्यमंत्री का कहना था कि प्रशासन के इस कदम की जानकारी मिलने पर उन्होंने जिले के वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन न तो जिलाधिकारी ने उनकी कॉल का संज्ञान लिया और न ही पुलिस अधीक्षक अथवा स्थानीय कोतवाल ने बात की। इस स्थिति के चलते उन्हें राजधानी लखनऊ में अपने आवश्यक शासकीय कार्यों को छोड़कर तत्काल सीतापुर का रुख करना पड़ा। कोतवाली परिसर के बाहर एकत्र लोगों और समर्थकों के सामने उन्होंने कहा कि यदि एक जनप्रतिनिधि की बात को भी अधिकारी अनसुना करेंगे, तो व्यवस्था में आम नागरिकों और जमीनी कार्यकर्ताओं की समस्याओं की सुनवाई कैसे होगी।
- अतिक्रमण अभियान और कार्यकर्ताओं की हिरासत
सीतापुर नगर क्षेत्र में यातायात को सुगम बनाने और सार्वजनिक मार्गों को अवरोधमुक्त करने के उद्देश्य से नगर पालिका और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान संचालित किया जा रहा था। इस कार्रवाई के दौरान नगर के एक व्यावसायिक क्षेत्र में दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों के साथ प्रशासनिक अमले की तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। सूचना पाकर कुछ स्थानीय राजनीतिक कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने कार्रवाई के तौर-तरीकों पर आपत्ति जताई।
विवाद बढ़ने की स्थिति में मौके पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने का हवाला देते हुए पुलिस टीम ने हस्तक्षेप किया और विरोध कर रहे कुछ कार्यकर्ताओं को अपनी गाड़ी में बैठाकर नगर कोतवाली ले आई। कार्यकर्ताओं को थाने लाए जाने की खबर जैसे ही शहर में फैली, स्थानीय कार्यकर्ताओं में असंतोष व्याप्त हो गया और उन्होंने इस पूरे मामले की जानकारी सीधे लखनऊ में मौजूद राज्यमंत्री राकेश राठौर 'गुरू' को दी।
- प्रशासनिक संवाद में देर रात कोतवाली का रुख
कार्यकर्ताओं की ओर से संपर्क किए जाने के बाद राज्यमंत्री ने लखनऊ से ही प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय स्थापित करने की कोशिश की। उनका उद्देश्य मौके के तनाव को कम करना और मामले का शांतिपूर्ण समाधान निकालना था। हालांकि, जब संबंधित अधिकारियों के स्तर से कोई सकारात्मक संवाद नहीं हुआ और कॉल का उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने स्वयं मौके पर पहुंचने का फैसला किया।
देर रात सीतापुर पहुंचने के बाद राज्यमंत्री सीधे नगर कोतवाली पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने गेट पर ही रुककर संवाददाताओं और उपस्थित लोगों के समक्ष अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने भारी मन से कहा कि जनता ने उन्हें चुनकर जिम्मेदारी सौंपी है और कार्यकर्ताओं के सहयोग से ही शासन की नीतियां धरातल पर उतरती हैं। जब जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल को भी दरकिनार किया जाएगा, तो यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसंवाद को कमजोर करने जैसा है।
- अधिकारियों के रवैये पर उठाए गए गंभीर सवाल
कोतवाली के बाहर बोलते हुए राज्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी नियम-विरुद्ध कार्य का समर्थन नहीं करते हैं, लेकिन प्रशासन को जनता और उनके प्रतिनिधियों के प्रति संवेदनशील और जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी व्यवस्था का संचालन करने के लिए हैं, न कि जनभावनाओं की अनदेखी करने के लिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी स्थानीय अभियान में कोई विवाद पैदा होता है, तो वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वे मौके की वस्तुस्थिति समझें और चुने हुए प्रतिनिधियों से संवाद कर समाधान निकालें। बातचीत के रास्ते बंद करने से समस्याएं सुलझने के बजाय और अधिक उलझ जाती हैं। इस घटनाक्रम ने जिले में प्रशासनिक मशीनरी और जन प्रतिनिधियों के बीच आपसी तालमेल के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
- कोतवाली परिसर में समर्थकों का जमावड़ा
राज्यमंत्री के देर रात कोतवाली पहुंचने की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, समर्थक और विभिन्न व्यापारिक संगठनों से जुड़े लोग भी थाने के बाहर जुटने लगे। माहौल की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली परिसर और आसपास अतिरिक्त पुलिस बल को सतर्क कर दिया गया। मौके पर मौजूद कनिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को सामान्य करने और मंत्री को समझाने का प्रयास किया।
काफी देर तक चले विचार-विमर्श और संवाद के बाद हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं के संदर्भ में नियमानुसार आवश्यक प्रक्रिया पूरी की गई। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देर रात ही मंत्री अपने स्थानीय आवास के लिए रवाना हुए, लेकिन उनके इस रुख की चर्चा पूरे जिले के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में तेजी से फैल गई है।
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