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गीत - महिला दिवस: एक दिवस क्या माँ ने हर पल, हर दिन महि...

अलस सवेरे उठी पिता सँग स्नान-ध्यान कर भोग लगाया। खुश लड्डू गोपाल हुए तो...

गीत - नारी मन, होता है भरपूर, कोमल भावों से पूर्ण...

प्रेम और समर्पण एक अनजान पथिक  के साथ चल देती है

गीत- रजनीगंधा बुला रही है....

अन्तर में मकरन्द छिपाये रजनीगन्धा बुला रही है

Happy New Year 2025: गीत- बीता हुआ साल.....

बीते हुए साल में जो दिया , सभी सहा, " पर अब "

दीपावली विशेष गीत: सोने की छड़ियाँ- झिलमिल-झिलमिल दीपों ...

धीरे-धीरे खुशियों की , आहट फिर से आई। होने वाली है घर में....