दीपावली विशेष गीत: सोने की छड़ियाँ- झिलमिल-झिलमिल दीपों के संग...... ।
धीरे-धीरे खुशियों की , आहट फिर से आई। होने वाली है घर में....
डॉ. मधु प्रधान ,कानपुर
दीपावली
सोने की छड़ियाँ
झिलमिल-झिलमिल
दीपों के संग
हैं झालर लड़ियाँ
सबके बीच झूम कर
हँसती खिलती फुलझड़ियाँ
धीरे-धीरे खुशियों की
आहट फिर से आई
होने वाली है घर में
खुशियों की पहुनाई
गेंदे पर
आई बहार है
चटक रही कलियाँ
ऐपन थापे लगा द्वार पर
रच दी रंगोली
मैना तोते के कानों में
चुपके से बोली
चुन-चुन कर मन
जोड़ रहा है
सुधियों की कड़ियाँ
साँझ सुहानी लाई
स्वर्णिम किरणों का मेला
काट रहा है तिमिर-जाल को
दीपक अलबेला
मावस ने
बाँटी हैं सबको
सोने की छड़ियाँ
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