गीत - नारी मन, होता है भरपूर, कोमल भावों से पूर्ण...
प्रेम और समर्पण एक अनजान पथिक के साथ चल देती है
गीत
रचना- मीतू मिश्रा
नारी मन
होता है भरपूर
कोमल भावों से पूर्ण
दिखती है सख्त
नारियल की तरह
बन जाती है
जीवन दायनी
उड़ेल कर सारा
प्रेम और समर्पण
एक अनजान पथिक
के साथ चल देती है
देती है पूरा विश्वास
किसी मंझे हुए कलाकार की
तरह
भर देती है रंग
पुरुष रूपी संसार में
गढ़ती है नई परिभाषा
त्याग और तपस्या की
कतरे कतरे रक्त से
देती है जन्म
नई पौध को
होती मगन भूलती अस्त्तित्व
खो जाती एकदिन
स्वयं के रचे संसार में
होकर व्यर्थ
दब जाते हैं उसके सपने
ढेरों रंग और भावनाएं
उसी मिट्टी के भीतर
अनकहे अनबूझे से..
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