यूपी में 'दुग्ध शक्ति' से समृद्ध हो रहीं महिलाएं: 4.12 लाख दुग्ध उत्पादक जुड़ीं, 72 हजार से अधिक बनीं लखपति दीदी
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने बताया कि यूपी में 5 महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियों से 4.12 लाख महिलाएं जुड़ी हैं। 72,669 महिलाएं 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं।
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने की दिशा में राज्य सरकार के प्रयास ऐतिहासिक परिणाम दे रहे हैं। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की पहल एवं कुशल मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के अंतर्गत संचालित महिला नेतृत्व वाली मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां ग्रामीण दुग्ध व्यवस्था में युगांतरकारी बदलाव की धुरी बन चुकी हैं। वर्तमान में इन कंपनियों के माध्यम से प्रदेश के 31 जनपदों के 7,298 गांवों में 4.12 लाख महिला दुग्ध उत्पादक संगठित रूप से जुड़ी हैं। इन कंपनियों ने अपनी स्थापना से अब तक 5,839 करोड़ रुपये का कुल कारोबार करते हुए लगभग 132 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है, जिसके फलस्वरूप 72,669 महिलाएं सफलतापूर्वक 'लखपति दीदी' के रूप में स्थापित हो चुकी हैं।
मिशन के तहत गठित पांच प्रमुख महिला मिल्क प्रोड्यूसर कंपनियां क्षेत्रीय स्तर पर महिलाओं को संगठित कर पारदर्शी मूल्य और स्थायी बाजार उपलब्ध करा रही हैं। बुंदेलखंड के 7 जिलों के 1,445 गांवों में कार्यरत 'बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी' से 96,320 महिलाएं जुड़ी हैं, जिसने 2,295 करोड़ रुपये का कारोबार कर 26,189 महिलाओं को 'लखपति दीदी' बनाया है। पूर्वांचल क्षेत्र में संचालित 'काशी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी' ने 855 करोड़ के कारोबार के साथ 13,219 महिलाओं को लखपति दीदी का दर्जा दिलाया। मध्य क्षेत्र की 'सामर्थ्य मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी' (1.12 लाख सदस्य) ने 1,841 करोड़ रुपये का कारोबार कर 18,000 महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है। वहीं, गोरखपुर क्षेत्र की 'श्री बाबा गोरखनाथ कृपा मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी' से 6,269 और तराई क्षेत्र की 'सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी' से 8,992 महिलाएं लखपति दीदी बनकर उभरी हैं।
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता पारदर्शिता और समयबद्ध भुगतान प्रणाली है। संकलन केंद्रों पर आधुनिक मशीनों द्वारा दूध की गुणवत्ता के आधार पर फैट एवं एसएनएफ आधारित पारदर्शी मूल्य तय किया जाता है। बिचौलियों की भूमिका समाप्त करते हुए प्रत्येक माह की 3, 13 और 23 तारीख को दूध का भुगतान सीधे महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के जरिए भेजा जाता है। इससे महिलाओं को नियमित और सुनिश्चित आय प्राप्त हो रही है। जहां बलिनी और सामर्थ्य कंपनियां दूध संग्रहण के साथ-साथ घी और पनीर का मूल्य संवर्धन व प्रसंस्करण कर रही हैं, वहीं काशी, श्री बाबा गोरखनाथ कृपा और सृजनी कंपनियां संकलित दूध को मदर डेयरी को आपूर्ति कर रही हैं।
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि महिला नेतृत्व वाला यह दुग्ध मूल्य श्रृंखला मॉडल गांवों में आजीविका और रोजगार सृजन का सशक्त जरिया बन चुका है। स्वयं सहायता समूहों की दीदियां अब केवल पशुपालक न रहकर उत्पादन, प्रसंस्करण, प्रबंधन और विपणन जैसे व्यावसायिक निर्णयों में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि महिलाओं की यह आर्थिक आत्मनिर्भरता प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक योगदान देगी।
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