यूपी न्याय प्रणाली का डिजिटल कायाकल्प: ICJS 2.0 से जुड़ीं पुलिस व अदालतें, NCL डैशबोर्ड पर 85.99 हुआ स्कोर
योगी सरकार में यूपी की न्याय व्यवस्था का डिजिटल आधुनिकीकरण। ICJS 2.0 और ई-फॉरेंसिक से जुड़े पुलिस, कोर्ट व जेल; NCL डैशबोर्ड पर प्रदेश का स्कोर 85.99 पहुंचा।
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आपराधिक न्याय प्रणाली का व्यापक डिजिटल कायाकल्प किया जा रहा है। नए आपराधिक कानूनों (एनसीएल) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पुलिस, विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं (एफएसएल), अभियोजन, कारागार और न्यायालयों को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस 2.0) और क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। इसका मुख्य ध्येय अपराध की विवेचना से लेकर न्यायिक निर्णय तक की संपूर्ण प्रक्रिया को त्वरित और पारदर्शी बनाना है।
राज्य सरकार के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि एनसीएल (नए आपराधिक कानून) रैंकिंग डैशबोर्ड पर उत्तर प्रदेश का स्कोर 25 जून 2026 के 78.13 अंक से बढ़कर 12 सितंबर 2026 तक 85.99 अंक पर पहुंच गया है। मात्र ढाई माह में 7.86 अंकों का यह सुधार प्रदेश की तीव्र कार्यप्रणाली को दर्शाता है। राज्य ने नोटिफिकेशन जारी करने, मॉडल रूल्स लागू करने, आईसीजेएस इंटीग्रेशन और MedLEaPR पोर्टल के संचालन में 10 में से 10 पूर्णांक हासिल किए हैं। इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) और 'न्याय श्रुति' में शत-प्रतिशत 5 में से 5 अंक मिले हैं। साक्ष्य संकलन की गति बढ़ाने के लिए 'ई-साक्ष्य' और 60 व 90 दिनों में विवेचना पूरी करने की समयसीमा की निगरानी के लिए अलग से विशेष डैशबोर्ड क्रियान्वित किए गए हैं, जिसका एक्सेस इलाहाबाद उच्च न्यायालय को भी सुलभ कराया गया है।
जांच प्रक्रिया को वैज्ञानिक आधार देने के लिए प्रदेश में जुलाई 2026 से लागू 'ई-फॉरेंसिक 2.0' के अंतर्गत अब तक 6,334 प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें से 535 मामलों की अंतिम रिपोर्टिंग ऑनलाइन पूरी कर ली गई है। केस रजिस्ट्रेशन, डिजिटल आवंटन और डिस्पैच को पूरी तरह पेपरलेस किया गया है। विधि विज्ञान प्रयोगशालाओं की क्षमता संवर्धन के लिए 12 प्रमुख प्रयोगशालाओं के आठ-आठ अनुभागों हेतु 192 हाई-एंड कंप्यूटर तथा सुरक्षित डेटा भंडारण के लिए क्लाउड स्टोरेज या नेटवर्क अटैच्ड स्टोरेज (एनएएस) की व्यवस्था की जा रही है। थानों से नमूनों के पारदर्शी प्रेषण के लिए सीसीटीएनएस में क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की गई है।
तकनीकी आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के क्रम में प्रदेश के 1,982 पुलिस थानों और 18 फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं को अत्याधुनिक एसडी-वैन (SD-WAN) नेटवर्क से लैस किया जा रहा है। इसके साथ ही कारागार विभाग में 535 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयों की स्थापना का कार्य पूर्ण कर लिया गया है, जिससे जेलों और अदालतों के बीच कैदियों की वर्चुअल पेशी को निर्बाध बनाया जा सके। यह एकीकृत डिजिटल एक्शन प्लान प्रदेश की न्याय व्यवस्था को आधुनिक युग की जरूरतों के अनुरूप अधिक संवेदनशील, पारदर्शी और प्रभावी बना रहा है।
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