UP Weather Alert: यूपी में 27 सितंबर तक भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी, योगी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को किया अलर्ट
उत्तर प्रदेश में 27 सितंबर तक भारी बारिश और वज्रपात के पूर्वानुमान पर शासन ने रेड व ऑरेंज अलर्ट वाले जिलों के डीएम को मुस्तैद रहने और सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मौसम के बदले मिजाज और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी भारी बारिश, तेज आंधी तथा आकाशीय बिजली (वज्रपात) की गंभीर चेतावनी के बाद राज्य सरकार पूरी तरह सक्रिय हो गई है। आमजन के जान-माल की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शासन स्तर से सभी संबंधित जिलों के प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। उत्तर प्रदेश के राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने रेड और ऑरेंज अलर्ट की श्रेणी में शामिल जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर आपातकालीन तैयारियों, राहत व्यवस्थाओं और जलभराव से निपटने की रणनीतियों की गहन समीक्षा की।
राहत आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रशासनिक और तकनीकी अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में सक्रिय रहकर संवेदनशील क्षेत्रों का निरंतर निरीक्षण करें। किसी भी अप्रिय घटना या जलभराव की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दल (कमांड एंड रिलीफ यूनिट्स) तत्काल मौके पर पहुंचकर राहत कार्य सुनिश्चित करें।
मौसम विभाग का पूर्वानुमान: 27 सितंबर तक सक्रिय रहेगा मानसून
मौसम विज्ञान विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, वायुमंडलीय दबाव और मानसूनी ट्रफ के प्रभाव से उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में 27 सितंबर तक मौसम प्रतिकूल बना रहेगा।
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पूर्वी उत्तर प्रदेश: 25 और 26 सितंबर को तराई व पूर्वी अंचल के जिलों में कहीं-कहीं अत्यधिक भारी बारिश तथा 27 सितंबर को गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश: 25 से 27 सितंबर के मध्य पश्चिमी जनपदों में मध्यम से भारी वर्षा के साथ आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है।
रेड और ऑरेंज अलर्ट वाले जनपदों में कड़ी निगरानी
आपदा प्रबंधन तंत्र को सुचारु रखने के लिए राज्य के जिलों को मौसम की गंभीरता के आधार पर चिन्हित किया गया है:
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रेड अलर्ट वाले प्रमुख जिले: लखीमपुर खीरी, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, रामपुर, बरेली, पीलीभीत और शाहजहांपुर शामिल हैं। इन जनपदों में स्थानीय प्रशासन को चौबीसों घंटे कंट्रोल रूम संचालित करने और पंपिंग सेट व ड्रेनेज टीमों को स्टैंडबाय पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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ऑरेंज अलर्ट वाले जिले: बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, संत कबीर नगर, महाराजगंज, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर, बस्ती, हरदोई, लखनऊ, बाराबंकी, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, संभल तथा बदायूं सहित अन्य आसपास के क्षेत्रों में प्रशासन को लगातार जलस्तर और मौसम की स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है।
नदियों के जलस्तर और अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की आशंका पर तैयारी
लगातार वर्षा के कारण जलभराव और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी तटवर्ती और वाटरशेड क्षेत्रों में विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, मऊ, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, गोरखपुर, बस्ती, बलरामपुर, श्रावस्ती, लखीमपुर खीरी, बहराइच, उन्नाव, कानपुर नगर, फतेहपुर और चित्रकूट सहित 30 से अधिक जिलों के संवेदनशील वाटरशेड इलाकों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) की संभावना जताई गई है।
राहत आयुक्त ने राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) और पीएसी की बाढ़ राहत कंपनियों को स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर मोटरबोट, लाइफ जैकेट और आवश्यक राहत सामग्री के साथ तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।
वज्रपात और तेज आंधी से बचाव के लिए जन-जागरूकता पर जोर
वज्रपात से होने वाली जनहानि को न्यूनतम करने के लिए प्रशासन ने व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों से कहा कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में पब्लिक एड्रेस सिस्टम, ग्राम पंचायत स्तर पर मुनादी और स्थानीय मीडिया के जरिए लोगों को जागरूक किया जाए।
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आंधी-बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट के समय खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों, धातु के खंभों, बाग-बगीचों और पार्कों के नीचे शरण न लें।
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खुले आसमान के नीचे रहने वाले बेसहारा व्यक्तियों और झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित पक्के आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाए।
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ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे आंधी-पानी के दौरान मवेशियों को पेड़ों के नीचे न बांधें।
जिलाधिकारियों को परिस्थितियों के आधार पर स्थानीय निर्णय लेने की छूट
आम नागरिकों और छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शासन ने जिलाधिकारियों को पूर्ण प्रशासनिक अधिकार दिए हैं। स्थानीय परिस्थितियों, जलभराव की स्थिति और वर्षा की तीव्रता को देखते हुए जिलाधिकारी अपने विवेकाधिकार का प्रयोग कर आवश्यकतानुसार बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षण संस्थानों (स्कूल-कॉलेजों) में अवकाश घोषित कर सकते हैं तथा गैर-आपातकालीन प्रशासनिक सेवाओं के संचालन को नियंत्रित कर सकते हैं। शासन ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की जान-माल की हिफाजत सर्वोपरि है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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