Lucknow: हिमालय की आध्यात्मिक चेतना को समर्पित कला प्रदर्शनी। 

उत्तर प्रदेश सरकार कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन

Dec 15, 2025 - 17:34
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Lucknow: हिमालय की आध्यात्मिक चेतना को समर्पित कला प्रदर्शनी। 
हिमालय की आध्यात्मिक चेतना को समर्पित कला प्रदर्शनी। 

उत्तर प्रदेश सरकार कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के मार्गदर्शन में राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश द्वारा श्री हरि दर्शन सांख्य की हिमालय की आध्यात्मिक अनुभूति पर आधारित एकल चित्र प्रदर्शनी “हिमालय - आध्यात्मिक मौन की पवित्र अनुभूति” का शुभारंभ 14 दिसंबर 2025 को लाल बारादरी भवन परिसर, लखनऊ में किया गया।

प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि स्वांत रंजन जी (अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं राष्ट्रीय पालक अधिकारी, संस्कार भारती) द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने की। अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चन्द्र मिश्र ने कलाकारों, अतिथियों एवं कला प्रेमियों का स्वागत किया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में कला विद्यार्थी, मीडिया प्रतिनिधि एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि स्वांत रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि यह प्रदर्शनी हिमालय की आध्यात्मिक यात्रा का सशक्त कलात्मक रूप है और कलाकार हरि दर्शन सांख्य का यह प्रयास अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कलाकार की कृतियाँ दर्शकों को आत्मचिंतन और शांति की अनुभूति कराती हैं।

यह प्रदर्शनी राज्य ललित कला अकादमी, उ.प्र. की कला प्रदर्शनी योजना के अंतर्गत आयोजित की गई है, जिसमें मिर्ज़ापुर निवासी कलाकार हरि दर्शन सांख्य की चयनित कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। उनकी कृतियाँ लगभग दो वर्षों की हिमालयी यात्रा और साधना का परिणाम हैं, जिनमें रंग, प्रकृति और भारतीय दर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने प्रदर्शनी को कलाकारों एवं विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया। अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्रा ने कहा कि प्रदर्शनी देखकर लगता है हम हिमालय की यात्रा कर रहे है जबकि अकादमी के निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने कहा कि यह प्रदर्शनी प्रकृति और आत्मचिंतन के बीच एक सार्थक कलात्मक संवाद प्रस्तुत करती है। 

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