Ayodhya News: अयोध्या में सिस्टम की बेरुखी! 90 साल की राजपति देवी 5 साल से खंडहर में रहने को मजबूर, पक्की छत की आस अब भी अधूरी
सरकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना है, लेकिन अयोध्या के रामनगर तिवारीपुर ग्राम
अयोध्या। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के सबसे जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाना है, लेकिन अयोध्या के रामनगर तिवारीपुर ग्राम पंचायत से सामने आई एक बुजुर्ग महिला की कहानी व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती है। 90 वर्षीय राजपति तिवारी पिछले करीब पांच वर्षों से एक जर्जर मकान में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं।
जिस उम्र में बुजुर्गों को सुरक्षित छत, सम्मान और सहारे की जरूरत होती है, उस उम्र में राजपति देवी और उनके बीमार पति के सामने हर दिन अपने आशियाने की सुरक्षा का डर बना रहता है। उनका मिट्टी का मकान काफी जर्जर हो चुका है। दीवारें कमजोर हैं और छत भी खराब हालत में है। बारिश के दिनों में घर के भीतर पानी टपकता है, जिससे बुजुर्ग दंपति की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
- चार बेटे हैं, फिर भी अकेले गुजर रही जिंदगी
राजपति देवी के चार बेटे और बहुएं हैं, लेकिन सभी अलग-अलग रहते हैं। पति की तबीयत खराब रहने के कारण बुजुर्ग दंपति अपनी जिंदगी इसी जर्जर मकान में किसी तरह गुजार रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मकान की हालत बेहद खराब है और लगातार बारिश या किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में खतरा और बढ़ सकता है। इसके बावजूद अभी तक उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध नहीं हो सका है।
- आवास और शौचालय के लिए पांच साल से लगा रहीं गुहार
राजपति देवी का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिलाए जाने के लिए कई बार जिम्मेदार लोगों से संपर्क किया। ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और रोजगार सेवक से लेकर तहसील स्तर तक अपनी समस्या पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन ही मिला। बुजुर्ग महिला के मुताबिक, उनके घर में आज तक शौचालय भी नहीं बन सका है। 90 वर्ष की उम्र में उन्हें खुले में शौच के लिए जाने की मजबूरी है। परिवार को मिलने वाले सीमित राशन से गुजारा करना भी मुश्किल बताया जा रहा है।
- अब जिलाधिकारी से लगाई आखिरी उम्मीद
स्थानीय स्तर पर कई बार फरियाद के बाद राजपति देवी ने अब जिलाधिकारी अयोध्या को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने और मानवीय आधार पर आवास एवं शौचालय उपलब्ध कराने की मांग की है बुजुर्ग महिला की उम्मीद अब जिला प्रशासन पर टिकी है। उनका कहना है कि उम्र के इस पड़ाव पर वह किसी बड़ी मांग के बजाय सिर्फ एक सुरक्षित छत चाहती हैं, जहां वह और उनके बीमार पति बिना डर के रह सकें।
- सवाल सिर्फ एक मकान का नहीं, व्यवस्था की पहुंच का है
राजपति देवी की कहानी सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में उन लोगों तक कितना पहुंच रहा है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। एक तरफ गरीब और जरूरतमंद परिवारों को आवास और शौचालय उपलब्ध कराने की योजनाएं संचालित हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला पांच साल से पक्की छत के लिए अधिकारियों के चक्कर लगाने का दावा कर रही हैं।
अब देखना होगा कि राजपति देवी की फरियाद जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद मामले की जांच होती है या नहीं और उन्हें सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कदम उठाता है। फिलहाल, 90 साल की इस बुजुर्ग महिला की नजर प्रशासन से मिलने वाली मदद पर टिकी हुई है।
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