न घर, न पेंशन, न राशन...पांच मासूमों संग पन्नी की छत तले गुजर रही पूनम की जिंदगी, सरकारी योजनाओं के इंतजार में परिवार

हरियावां विकासखंड की ग्राम पंचायत पिपरी-नेवादा में रहने वाली पूनम सिंह का परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं

Jul 11, 2026 - 12:46
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न घर, न पेंशन, न राशन...पांच मासूमों संग पन्नी की छत तले गुजर रही पूनम की जिंदगी, सरकारी योजनाओं के इंतजार में परिवार
पांच मासूमों संग पन्नी की छत तले गुजर रही पूनम की जिंदगी, सरकारी योजनाओं के इंतजार में परिवार

हरदोई। हरियावां विकासखंड की ग्राम पंचायत पिपरी-नेवादा में रहने वाली पूनम सिंह का परिवार आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। तीन माह पहले बीमारी के कारण पति सुधीर कुमार सिंह के निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया। पति की मौत के साथ ही घर की आय का एकमात्र सहारा भी खत्म हो गया, जिससे पांच बच्चों का पालन-पोषण बेहद कठिन हो गया है।

परिवार जिस कच्चे मकान में रह रहा है, उसकी हालत बेहद जर्जर है। पहले किसी तरह टीन की चादरों के सहारे बारिश और धूप से बचाव हो जाता था, लेकिन हाल ही में आई तेज आंधी में वह भी उड़ गई। अब दीवारों के ऊपर प्लास्टिक (पन्नी) डालकर किसी तरह सिर छिपाने की कोशिश की जा रही है। बारिश के दौरान घर के भीतर पानी भर जाता है और हर समय मकान गिरने का खतरा बना रहता है।

पूनम सिंह के परिवार में चार बेटियां और एक सात वर्षीय बेटा है। उनका कहना है कि पति के जीवित रहने तक मजदूरी से घर का खर्च किसी तरह चलता था, लेकिन अब हालात इतने खराब हैं कि कई बार परिवार को दिन में केवल एक समय भोजन ही मिल पाता है। बच्चों से जुड़ी सरकारी औपचारिकताएं भी अधूरी हैं। कुछ बच्चों के नाम अभी तक राशन कार्ड में दर्ज नहीं हैं, जबकि दो बच्चों के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र भी नहीं बन सके हैं। इसके कारण वे कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। पूनम का आरोप है कि अब तक उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिला है। विधवा पेंशन भी स्वीकृत नहीं हुई और अन्य सरकारी सहायता भी नहीं मिल सकी। ऐसे में परिवार का भविष्य पूरी तरह अनिश्चित नजर आ रहा है।

अपनी समस्याओं को लेकर पूनम सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर आवास, राशन कार्ड में बच्चों के नाम जोड़ने, विधवा पेंशन स्वीकृत कराने तथा बच्चों के आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की मांग की है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन इस परिवार की समस्याओं पर कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है और क्या पांच मासूम बच्चों के सिर पर पन्नी की अस्थायी छत की जगह एक सुरक्षित आशियाना उपलब्ध हो पाता है।

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