लखनऊ विकास प्राधिकरण में बड़ी कार्रवाई: 52 करोड़ के कुर्की मामले में सर्वेयर निलंबित, अफसरों से जवाब तलब
लखनऊ विकास प्राधिकरण में भूमि अर्जन मामले में शिथिलता पर उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार का एक्शन। सर्वेयर उदय नारायण निलंबित, संयुक्त सचिव को सौंपी गई जांच।
लखनऊ। विकास प्राधिकरण में भूमि अर्जन से संबंधित प्रकरणों में विधिक पैरवी में लापरवाही और कार्य में शिथिलता बरतने के मामले को गंभीरता से लेते हुए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। प्राधिकरण के अर्जन अनुभाग में पदस्थ सर्वेयर उदय नारायण को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही अनुभाग के संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब करते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
प्राधिकरण के अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा के अनुसार, जियामऊ क्षेत्र में गोमती बैराज से लामार्टिनियर तक सुनियोजित विकास योजना भाग-एक के अंतर्गत प्राधिकरण द्वारा मजहर अली खान की भूमि अधिग्रहीत की गई थी। इस अर्जन के एवज में अपर जिलाधिकारी स्तर से प्रतिकर की धनराशि निर्धारित की गई थी। निर्धारित प्रतिकर से असंतुष्ट होकर भू-स्वामी ने भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण (लारा कोर्ट) में याचिका दायर की थी। प्राधिकरण की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के चलते अदालत ने प्रतिकर की राशि में बढ़ोतरी का फैसला सुना दिया।
इस निर्णय को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय में अपील दायर करने की प्रक्रिया शुरू की गई और नामित अधिवक्ता के माध्यम से याचिका तैयार कराई गई। किंतु कोर्ट फीस का समय से भुगतान न किए जाने के कारण उच्च न्यायालय में अपील पर समयबद्ध सुनवाई नहीं हो सकी। दूसरी ओर भू-स्वामी ने पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए निष्पादन वाद दाखिल कर दिया, जिसमें अदालत ने प्राधिकरण के विरुद्ध 52 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का कुर्की आदेश पारित कर दिया।
समीक्षा के दौरान उपाध्यक्ष ने पाया कि समय रहते निर्धारित विधिक शुल्क जमा कर दिया जाता, तो प्राधिकरण को कुर्की जैसी अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़ता। इस गंभीर चूक को प्रशासनिक शिथिलता मानते हुए सर्वेयर को निलंबित कर दिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए संयुक्त सचिव अरविंद कुमार को जांच अधिकारी नामित किया गया है, जो विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
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