PK Verma Political Journey: पीके वर्मा- संघर्ष, संगठन और जनसेवा से राष्ट्रीय परिषद तक का प्रेरणादायी सफर
अनुसूचित समाज के एक सामान्य परिवार मे जन्मे पीके वर्मा ने अपने संघर्ष, संगठनात्मक क्षमता, जनसरोकारों और
जनपद हरदोई के अनुसूचित समाज के एक सामान्य परिवार मे जन्मे पीके वर्मा ने अपने संघर्ष, संगठनात्मक क्षमता, जनसरोकारों और भारतीय जनता पार्टी के प्रति अटूट निष्ठा के बल पर राजनीति मे अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित की है। उनका राजनीतिक जीवन पद प्राप्त करने की आकांक्षा से अधिक संगठन, समाज और जनसेवा के प्रति समर्पण की निरंतर यात्रा रहा है।
वर्ष 2005 में विकासखंड हरियावां के ब्लॉक प्रमुख पद का प्रथम चुनाव लड़कर उन्होंने अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। जनसंपर्क, लोकप्रियता, सक्रियता और संगठन के प्रति समर्पण ने शीघ्र ही उन्हें क्षेत्रीय राजनीति में एक प्रभावशाली युवा नेतृत्व के रूप में स्थापित किया। इसी का परिणाम रहा कि वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उनकी राजनीतिक सक्रियता एवं जनाधार को देखते हुए तत्कालीन हरियावां-बावन विधानसभा क्षेत्र से उन्हें पार्टी का प्रत्याशी बनाया।
भाजपा हरदोई के जिला उपाध्यक्ष के रूप में आगामी तीन वर्षों तक पार्टी संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने तथा संगठन के विस्तार के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने के पश्चात् पीके वर्मा ने वर्ष 2012 मे परिसीमन के उपरांत विधानसभा क्षेत्र साण्डी से विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी प्रस्तुत की। इस अवधि मे उनके द्वारा विधानसभा साण्डी के प्रत्येक ग्राम का पथ भ्रमण कर, व्यापक जनसमर्थन अर्जित किया गया।
वर्ष 2012 में अपनी संगठनात्मक क्षमता और सक्रियता से पीके वर्मा ने केंद्रीय उपभोक्ता भंडार, हरदोई के चेयरमैन के रूप मे निर्वाचित होकर, सहकारिता गतिविधियों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण व जनकल्याणकारी कार्य किये। इसी क्रम मे वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश राज्य अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य के रूप मे उनका मनोनयन हुआ।
वर्ष 2015 मे पीके वर्मा ने अपनी राजनीतिक रणनीति, संगठनात्मक कौशल और व्यापक जनसंपर्क क्षमता का प्रभावशाली परिचय दिया। विकासखंड सांडी मे लंबे समय से प्रभावी सपा समर्थित राजनीतिक वर्चस्व के बीच उन्होंने अपनी अनुज वधु को ब्लॉक प्रमुख पद पर निर्वाचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस राजनीतिक सफलता ने जनपद हरदोई की राजनीति मे उनके बढ़ते प्रभाव और कुशल नेतृत्व को नई पहचान प्रदान की।
वर्ष 2016 में पीके वर्मा ने स्वयं को पार्टी कार्यकर्ता के रूप में भाजपा संगठन हेतु पूर्णतः समर्पित कर दिया। पार्टी नेतृत्व द्वारा सौंपे गए दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए उन्होंने जनपद में आयोजित विशाल जनसभाओं, रैलियों एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कठिन परिस्थितियों में भी संगठन के प्रति उनकी सक्रियता और समर्पण निरंतर बना रहा। पीके वर्मा ने व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा से ऊपर उठकर सदैव ही पार्टी के प्रत्येक निर्णय को स्वीकार किया और पहले से अधिक ऊर्जा एवं निष्ठा के साथ भारतीय जनता पार्टी तथा जनसेवा के कार्य में जुटे रहे।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव मे सांडी विधानसभा तथा वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में हरदोई लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट के लिए उन्होंने पुनः प्रबल दावेदारी प्रस्तुत की। हालांकि कतिपय कारणों से उन्हें भाजपा प्रत्याशी के रूप मे चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने निराश होकर संगठन से दूरी नहीं बनाई बल्कि विधानसभा चुनाव 2017 मे विधानसभा सांडी तथा लोकसभा चुनाव 2019 मे भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों के पक्ष मे सघन जनसम्पर्क व् चुनावी जनसभाओं का आयोजन करते हुए, चुनावी अभियान मे सक्रियता पूर्वक प्रतिभाग किया।
उनकी इसी निष्ठा, धैर्य, अनुशासन और संगठन के प्रति अटूट समर्पण को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2020 मे उन्हें भाजपा अवध क्षेत्र का क्षेत्रीय मंत्री नियुक्त किया। इसके पश्चात वर्ष 2021 में उनकी धर्मपत्नी प्रेमावती को हरदोई जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा प्रत्याशी बनाया गया। पार्टी के निर्देशानुसार श्रीमती प्रेमावती ने सरकारी शिक्षिका के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर चुनाव मैदान में प्रवेश किया। संगठन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के सहयोग तथा पीके वर्मा के कुशल मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्होंने सपा प्रत्याशी के विरुद्ध ऐतिहासिक विजय प्राप्त कर जिला पंचायत अध्यक्ष का पद हासिल किया।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिसवां विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बनाया। विधानसभा बिसवां सहित जनपद हरदोई के समस्त आठ विधानसभा क्षेत्रों तथा वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव मे जनपद हरदोई मे भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित प्रत्याशियों के पक्ष मे सघन जनसम्पर्क व् चुनावी जनसभाओं के माध्यम से पीके वर्मा ने भाजपा प्रत्याशियों के चुनावी अभियान मे सक्रियतापूर्वक सहभागिता की। उन्होंने संगठन एवं कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करते हुए, शत प्रतिशत भाजपा प्रत्याशियों की विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह सफलता उनके जमीनी संगठन, चुनावी रणनीति और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत समन्वय का प्रमाण बनी।
वर्ष 2022 से पीके वर्मा अनुसूचित मोर्चा, भाजपा अवध क्षेत्र के क्षेत्रीय महामंत्री का संगठनात्मक दायित्व निर्वहन करते हुए अवध क्षेत्र के समस्त जनपदों मे अनुसूचित मोर्चा का विस्तार व् सुदृढ़ीकरण हेतु निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। राजनीतिक एवं संगठनात्मक क्षेत्र में अपने दीर्घ व् समर्पित जीवन के उपरांत वर्ष 2025 में पीके वर्मा भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद मे सदस्य के रूप मे निर्वाचित हुए हैं। यह सम्मान उनके लिए ही नहीं, बल्कि उन तमाम कार्यकर्ताओं के लिए भी प्रेरणा का विषय है जो बिना किसी पद या व्यक्तिगत स्वार्थ की अपेक्षा के संगठन के लिए निरंतर कार्य करते हैं।
संघर्ष से सम्मान तक का सफर
पीके वर्मा की राजनीतिक यात्रा इस बात का उदाहरण है कि राजनीति में धैर्य, संघर्ष, संगठन के प्रति निष्ठा और निरंतर जनसंपर्क कभी व्यर्थ नहीं जाता। विधानसभा का टिकट न मिलने से लेकर संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों तक, उन्होंने प्रत्येक परिस्थिति को अवसर में बदलने का प्रयास किया। उन्होंने बार-बार यह साबित किया कि पद से बड़ा संगठन, व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से बड़ा विचार और राजनीतिक सफलता से बड़ा जनसेवा का संकल्प होता है।
हरियावां-बावन विधानसभा क्षेत्र से प्रारंभ हुई यह यात्रा आज भाजपा के राष्ट्रीय परिषद तक पहुंच चुकी है। एक साधारण परिवार से निकलकर संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए पीके वर्मा ने अपने संघर्ष, समर्पण और संगठनात्मक क्षमता के माध्यम से हरदोई की राजनीति में एक अलग पहचान बनाई है। पीके वर्मा की यात्रा केवल एक राजनेता की यात्रा नहीं, बल्कि एक ऐसे जमीनी कार्यकर्ता की कहानी है जिसने संघर्ष को अपनी शक्ति, संगठन को अपना परिवार और जनसेवा को अपना संकल्प बनाया है।
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