Saharanpur News: रातभर अफवाहों का दौर, सुबह कलेक्ट्रेट में चला बुलडोजर: सहारनपुर में मस्जिद का हिस्सा जमींदोज, 6 बुलडोजर और भारी पुलिस बल तैनात
जिला जज ने दो दिन पहले ही सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश रखा था बरकरार, मस्जिद पक्ष की अपील खारिज; रात में नेताओं ने डीएम से की थी कार्रवाई न होने की बात
सहारनपुर। कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद शनिवार सुबह अचानक बुलडोजर एक्शन में बदल गया। देर रात से ही सोशल मीडिया और शहर में मस्जिद को जमींदोज किए जाने की अफवाह फैल रही थी। रात बढ़ने के साथ कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास पुलिस बल की मौजूदगी भी बढ़ती गई। शनिवार तड़के करीब चार बजे से मस्जिद को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। सुबह तक मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया था। पूरी इमारत को हटाने के लिए प्रशासन की ओर से छह बुलडोजर लगाए गए हैं।
कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर में रात के समय अचानक भारी पुलिस फोर्स की तैनाती ने अफवाहों को और हवा दी। सामान्य दिनों में रात के समय कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था नहीं रहती। मुस्लिम पक्ष के लोगों और स्थानीय नेताओं को जब पुलिस बल की तैनाती और गेट बंद किए जाने की जानकारी मिली तो वे भी सक्रिय हो गए।
दो दिन पहले जिला जज ने बरकरार रखा था सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश
मस्जिद पर शनिवार को हुई कार्रवाई के पीछे करीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है। जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने 2 सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की ओर से दाखिल अपील खारिज करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। जिला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना। मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देते हुए 20 जुलाई को अपील दाखिल की थी और अदालत में कुल 17 तारीखों पर सुनवाई हुई।
सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मानते हुए बेदखली का आदेश दिया था। आदेश में 30 दिन में परिसर खाली करने के निर्देश के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी।
मस्जिद पक्ष की ओर से अदालत में इसे वक्फ संपत्ति बताते हुए दलील दी गई थी। पक्ष ने मस्जिद के करीब 150 वर्ष पुरानी होने का दावा भी किया था, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए जा सके।
देर रात फैल गई मस्जिद गिराने की खबर
शुक्रवार रात अचानक यह बात फैलने लगी कि कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को प्रशासन रात में ही गिराने जा रहा है। देखते ही देखते यह चर्चा शहर और सोशल मीडिया तक पहुंच गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर नेताओं और लोगों की हलचल बढ़ गई।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखी। उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव के माध्यम से घटनाक्रम की जानकारी दी। मुस्लिम पक्ष के नेताओं में भी बेचैनी बढ़ गई।
रात में सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने के लिए निकले, लेकिन उन्हें परिसर के गेट के बाहर ही रोक दिया गया। कलेक्ट्रेट के पांच गेट बंद कर दिए गए और पुलिस बल तैनात कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए रैपिड एक्शन फोर्स की भी तैनाती की गई।
डीएम से मुलाकात के बाद भी बदला पूरा घटनाक्रम
देर रात सपा के कई नेताओं की जिलाधिकारी अरविंद चौहान से मुलाकात की बात भी सामने आई। नेताओं की ओर से मस्जिद को लेकर कार्रवाई की आशंका जताई गई। बताया गया कि प्रशासन की ओर से उस समय यह भरोसा दिया गया कि मस्जिद को केवल सील किया जा रहा है और तत्काल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं होगी।
इसी वजह से रात में मौजूद मुस्लिम पक्ष के लोगों में यह उम्मीद बनी रही कि सुबह मस्जिद को नहीं गिराया जाएगा। लेकिन शनिवार तड़के हालात पूरी तरह बदल गए।
सुबह चार बजे शुरू हुआ एक्शन
शनिवार सुबह करीब चार बजे से कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई शुरू हो गई। कलेक्ट्रेट के गेट बंद कर दिए गए और बाहरी लोगों की आवाजाही रोक दी गई। परिसर के भीतर अधिकारी और पुलिसकर्मी मौजूद रहे। बाहर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात रही।
इसके बाद बुलडोजर मस्जिद तक पहुंचाए गए और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू हुई। शुरुआती कार्रवाई में मस्जिद का एक हिस्सा गिरा दिया गया। पूरी इमारत को हटाने के लिए छह बुलडोजर लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा इतनी कड़ी रही कि सामान्य लोगों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित हुई। पुलिस ने किसी भी तरह की भीड़ को परिसर के आसपास एकत्र होने से रोकने की कोशिश की।
इकरा हसन भी सहारनपुर आने वाली थीं, हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा
मामले को लेकर राजनीतिक सक्रियता भी देर रात बढ़ गई। कैराना सांसद इकरा हसन के भी सहारनपुर आने की तैयारी की जानकारी सामने आई, लेकिन उन्हें हाउस अरेस्ट किए जाने का दावा किया गया। इस घटनाक्रम से साफ हो गया कि प्रशासन किसी भी तरह की भीड़ या राजनीतिक जमावड़े को कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास नहीं होने देना चाहता था।
2025 में शुरू हुआ था विवाद
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी। इसके बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर (अनधिकृत अध्याशियों की बेदखली) अधिनियम के तहत मामला दाखिल हुआ था। लंबी सुनवाई के बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था।
मस्जिद पक्ष ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी। करीब डेढ़ महीने की सुनवाई के बाद जिला जज की अदालत ने 2 सितंबर को अपील खारिज कर दी और सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा।
अब शनिवार सुबह शुरू हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर शहर के केंद्र में ला दिया है। एक तरफ अदालत के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ मस्जिद पक्ष की ओर से कानूनी और राजनीतिक स्तर पर आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। फिलहाल कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।
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