Sitapur News: बिसवां क्षेत्र पंचायत में पोर्टल से रिकॉर्ड बदलने का आरोप, डीडीओ की जांच पर उठे सवाल

सीतापुर के बिसवां क्षेत्र पंचायत में वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत के 7 महीने बाद जांच करने पहुंचे डीडीओ। शिकायतकर्ता ने पोर्टल पर रिकॉर्ड बदलने का आरोप लगाया।

Jul 26, 2026 - 21:57
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Sitapur News: बिसवां क्षेत्र पंचायत में पोर्टल से रिकॉर्ड बदलने का आरोप, डीडीओ की जांच पर उठे सवाल

Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर

सीतापुर बिसवां क्षेत्र पंचायत में वित्तीय गड़बड़ी की जांच के बीच ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर रिकॉर्ड में बदलाव के गंभीर आरोप

सीतापुर जिले के विकास खंड बिसवां की क्षेत्र पंचायत में विकास कार्यों के नाम पर हुई कथित वित्तीय गड़बड़ी और फर्जी बिल के मामले में नया मोड़ आ गया है। राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच की शिकायत पर करीब सात महीने बाद जिला विकास अधिकारी जांच करने पहुंचे। लेकिन जांच प्रक्रिया शुरू होते ही संगठन ने आरोप लगाया कि जांच टीम के पहुंचने से पहले ही ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड दस्तावेजों को बदलकर साक्ष्यों से छेड़छाड़ की गई है।

संगठन के प्रतिनिधियों ने पहले जिलाधिकारी को पत्र सौंपकर बिसवां क्षेत्र पंचायत के विकास कार्यों में फर्जी बिल लगाने, एक ही बिल को अलग-अलग कार्यों में दर्ज करने और बिना वाउचर के भुगतान करने जैसी गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके महीनों बाद जब जिला विकास अधिकारी जांच के लिए बिसवां पहुंचे, तो राष्ट्रवादी युवा अधिकार मंच के पदाधिकारी एस.के. तूफानी ने उनके सामने कई दस्तावेज और स्क्रीनशॉट पेश किए।

शिकायतकर्ता का दावा है कि पहले ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर जो दस्तावेज जेपीजी रूप में दिखाई दे रहे थे, वे जांच वाले दिन अचानक पीडीएफ में बदल गए। इसके अलावा कुछ पुराने बिलों को हटाकर बाद में दोबारा अपलोड करने का भी दावा किया गया है। संगठन ने इस पूरे मामले को तकनीकी रूप से संदेहास्पद बताते हुए राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र यानी एनआईसी के माध्यम से निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है, ताकि यह पता चल सके कि किस कंप्यूटर लॉगिन और किस समय इन अभिलेखों में बदलाव किया गया।

मामले में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर आईटी कानून के तहत मामला दर्ज करने की मांग की गई है। जांच के दौरान जब अधिकारियों से इस संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने मामले को समझकर बताने की बात कही। संगठन का कहना है कि जब जांच से ठीक पहले रिकॉर्ड बदल दिए गए हैं, तो पूरे मामले का सच सामने लाने के लिए पोर्टल के बैकअप और लॉगिन हिस्ट्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।

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