UP News: उल्लास कार्यक्रम के तहत 75 जिलों में मूलभूत साक्षरता परीक्षा संपन्न, 5.10 लाख परीक्षार्थी शामिल
उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम की परीक्षा आयोजित हुई। 15 वर्ष से अधिक आयु के 5.10 लाख शिक्षार्थियों ने बुनियादी ज्ञान की परीक्षा दी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निरक्षरता उन्मूलन और समाज के प्रत्येक वंचित वर्ग तक बुनियादी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में रविवार को एक व्यापक अभियान संपन्न हुआ। राज्य सरकार की देखरेख में 'उल्लास–नव भारत साक्षरता कार्यक्रम' के तहत प्रदेश के सभी 75 जनपदों में एक साथ मूलभूत साक्षरता मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की गई। इस राज्यव्यापी परीक्षा में लगभग 5.10 लाख नव-साक्षरों ने सहभागिता की। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के साथ-साथ जिला कारागारों तथा बाल सुधार गृहों में भी विशेष परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जिससे समाज की मुख्यधारा से कटे व्यक्तियों को भी बुनियादी अक्षर ज्ञान और अंकगणित से जोड़ा जा सके।
15 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के असाक्षरों पर विशेष ध्यान
उल्लास (अंडरस्टैंडिंग ऑफ लाइफलांग लर्निंग फॉर ऑल इन सोसायटी) कार्यक्रम विशेष रूप से 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के ऐसे नागरिकों को लक्षित करता है, जो औपचारिक स्कूली शिक्षा प्राप्त करने से वंचित रह गए थे। इस अभियान का मुख्य ध्येय केवल ककहरा सिखाना नहीं, बल्कि दैनिक जीवन में उपयोगी बुनियादी पठन-पाठन, सामान्य लेखन और प्रारंभिक संख्यात्मक गणना (न्यूमरेसी) की क्षमता विकसित करना है।
रविवार को आयोजित इस मूल्यांकन परीक्षा में शामिल हुए 5.10 लाख शिक्षार्थियों को निर्धारित प्रश्न-पुस्तिका दी गई। इसमें सामान्य शब्द पहचान, वाक्य रचना, हस्ताक्षर करने का अभ्यास, साधारण जोड़-घटाव और दैनिक जीवन में मुद्रा के लेन-देन से जुड़े व्यावहारिक प्रश्न शामिल थे। इस परीक्षा का उद्देश्य यह देखना था कि शिक्षार्थी सामान्य दैनिक कार्यों जैसे बैंक फॉर्म भरना, बस का टिकट पढ़ना या मोबाइल पर जरूरी संदेश समझना बिना किसी पर निर्भर हुए कर पा रहे हैं या नहीं।
जेलों और बाल सुधार गृहों तक पहुंची अभियान की पहुंच
इस आयोजन की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि परीक्षा केंद्रों का दायरा सामान्य परिषदीय विद्यालयों तक सीमित नहीं रखा गया। राज्य के विभिन्न जिला कारागारों, केंद्रीय जेलों और राजकीय बाल संप्रेक्षण गृहों में भी पंजीकृत बंदियों व किशोरों के लिए परीक्षा का प्रबंध किया गया।
कारागार प्रशासन के समन्वय से चलाए गए इस विशेष प्रयास का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सजा काट रहे अथवा विचाराधीन बंदी जब रिहा होकर समाज में लौटें, तो वे निरक्षरता के दंश से मुक्त होकर आजीविका के नए रास्ते तलाश सकें। बंदियों ने भी इस परीक्षा में काफी रुचि दिखाई और निर्धारित समय में अपना प्रश्न पत्र हल किया।
पारदर्शी व्यवस्था के लिए केंद्र और राज्य स्तरीय टीमों की सीधी निगरानी
परीक्षा को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उच्च स्तरीय निगरानी तंत्र तैनात किया गया था। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की विशेष केंद्रीय टीम ने पूर्वांचल के चंदौली और जौनपुर जनपदों के विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान केंद्रीय अधिकारियों ने प्रश्न पत्रों के वितरण, बैठने की व्यवस्था और शिक्षार्थियों के उपस्थिति अभिलेखों की गहन पड़ताल की।
इसके अतिरिक्त, राज्य स्तर पर साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय तथा राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने अलग-अलग जनपदों में पहुंचकर जमीनी हकीकत परखी:
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लखनऊ: शिक्षा निदेशक (बेसिक/साक्षरता) अनिल भूषण चतुर्वेदी ने राजधानी के विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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प्रतापगढ़: उप निदेशक (साक्षरता) श्रीमती नीलम ने जनपद के ग्रामीण व शहरी केंद्रों में पहुंचकर परीक्षा संचालन की समीक्षा की।
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सोनभद्र: सहायक निदेशक (साक्षरता) श्रीमती प्रतिमा मिश्रा ने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के केंद्रों में उपस्थित रहकर शिक्षार्थियों के मूल्यांकन कार्य का पर्यवेक्षण किया।
जीवन कौशल और वित्तीय साक्षरता से जोड़ने की दूरगामी योजना
उल्लास कार्यक्रम की रूपरेखा केवल अक्षरों को पहचानने तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की अनुशंसाओं के अनुरूप इसे एक सतत सीखने की प्रक्रिया के रूप में तैयार किया गया है। इसके अंतर्गत शिक्षार्थियों को डिजिटल उपकरणों का उपयोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के प्राथमिक नियम, स्वच्छता व स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जागरूकता तथा सरकारी योजनाओं की सामान्य जानकारी भी दी जाती है।
मूल्यांकन के बाद सफल होने वाले सभी शिक्षार्थियों को राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (NIOS) तथा साक्षरता प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में साक्षरता प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र इन नव-साक्षरों में आत्मविश्वास भरने के साथ ही उन्हें आगे कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ने में भी सहायक सिद्ध होगा।
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