Harbhajan Singh Trolled: राजस्थान का 'जॉम्बी ड्रग' वीडियो पंजाब का बताकर घिरे हरभजन सिंह, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल

Harbhajan Singh Trolled: बीजेपी के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने राजस्थान के श्रीगंगानगर का वीडियो पंजाब का बताकर शेयर कर दिया। इसके बाद वे सोशल मीडिया पर ट्रोल हो गए।

Aug 11, 2026 - 13:53
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Harbhajan Singh Trolled: राजस्थान का 'जॉम्बी ड्रग' वीडियो पंजाब का बताकर घिरे हरभजन सिंह, सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल
Harbhajan Singh Trolled
  • हरभजन सिंह से हुई भारी चूक: राजस्थान के श्रीगंगानगर के वीडियो को बताया पंजाब का, इंटरनेट पर लोगों ने की खिंचाई
  • राजस्थान का 'जॉम्बी ड्रग' वीडियो पंजाब का बताकर फंसे हरभजन सिंह, सोशल मीडिया पर यूजर्स ने लगाई क्लास
  • Harbhajan Singh Controversy: 'जॉम्बी ड्रग' वीडियो के स्थान को लेकर विवाद, राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह हुए ट्रोल

पूर्व क्रिकेटर और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो शेयर करने के बाद मुश्किलों में घिर गए हैं। उन्होंने राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में रिकॉर्ड किए गए दो युवकों के नशे में बेसुध होने वाले 'जॉम्बी ड्रग' वीडियो को पंजाब राज्य का बताकर अपने आधिकारिक हैंडल से पोस्ट कर दिया। इस तथ्यात्मक चूक के तुरंत बाद इंटरनेट यूजर्स और विभिन्न राजनीतिक हलकों ने उन पर जानकारी की पुष्टि किए बिना भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी। हालांकि मामला उजागर होने के बाद वीडियो के वास्तविक स्थान को लेकर तथ्य सामने आ गए हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर लगातार बहस और आलोचना जारी है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दिग्गज गेंदबाज और वर्तमान में राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से एक बेहद संवेदनशील वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में दो युवक नशे की अति के कारण बेहद दयनीय और बेसुध अवस्था में नजर आ रहे थे, जिसे आमतौर पर 'जॉम्बी ड्रग' के प्रभाव के रूप में देखा जाता है। हरभजन सिंह ने इस वीडियो को पंजाब में नशे के बढ़ते प्रकोप से जोड़कर पोस्ट किया था। हालांकि, फैक्ट-चेक और स्थानीय जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वीडियो पंजाब का नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्य राजस्थान के सीमावर्ती जिले श्रीगंगानगर का है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हरभजन सिंह ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दो युवकों का वीडियो पोस्ट करते हुए राज्य में नशे की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। पोस्ट वायरल होते ही कई जागरूक यूजर्स ने वीडियो में दिख रहे बैकग्राउंड, बोलचाल और स्थानीय संदर्भों को पहचानना शुरू कर दिया। जांच में यह बात सामने आई कि यह घटना राजस्थान के श्रीगंगानगर की थी, जहां दोनों युवक प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के अत्यधिक सेवन के कारण अचेत हालत में सड़क किनारे पाए गए थे।

जब उपयोगकर्ताओं ने वीडियो की सही लोकेशन के साक्ष्य प्रस्तुत किए, तो सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह के खिलाफ प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। लोगों ने तर्क दिया कि एक सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति और संसद सदस्य को किसी भी संवेदनशील वीडियो को शेयर करने से पहले उसके तथ्यों और भौगोलिक स्थिति की गहनता से जांच कर लेनी चाहिए थी। बिना पुष्टि किए इसे पंजाब का बताना राज्य की छवि को अनावश्यक रूप से प्रभावित करने जैसा माना गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर सोशल मीडिया यूज़र्स, राजनीतिक विश्लेषकों और आम नागरिकों की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई इंटरनेट यूजर्स ने ट्वीट और पोस्ट के जरिए हरभजन सिंह को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे जनप्रतिनिधियों को फेक न्यूज या भ्रामक दावों से दूर रहना चाहिए। वहीं पंजाब के समर्थकों का कहना था कि बिना जांच-पड़ताल के किसी भी घटना को पंजाब से जोड़ देना उचित नहीं है।

दूसरी ओर, हरभजन सिंह के समर्थकों ने तर्क दिया कि उनका मुख्य उद्देश्य किसी राज्य विशेष को बदनाम करना नहीं, बल्कि युवाओं में फैलती नशे की लत के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना था। हालांकि, स्थान की गलत जानकारी के कारण मुद्दा मुख्य विषय से भटककर राजनीतिक और सामाजिक तकरार में बदल गया।

इस विवाद ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर 'फैक्ट-चेक' और जिम्मेदारी से पोस्ट करने के महत्व को रेखांकित किया है। जब कोई प्रसिद्ध हस्ती या जनप्रतिनिधि गलत संदर्भ के साथ कोई सामग्री साझा करता है, तो उससे जनमानस में भ्रामक संदेश जाता है। इस घटना से हरभजन सिंह की डिजिटल विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं। साथ ही, इसने राजस्थान के श्रीगंगानगर जैसे सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते नशे के खतरे की तरफ भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है, जिसे पहले पंजाब से जुड़ा मामला समझ लिया गया था।

इस विवाद के बाद उम्मीद की जा रही है कि जनप्रतिनिधि और सार्वजनिक हस्तियां भविष्य में किसी भी संवेदनशील या वायरल वीडियो को साझा करने से पहले उसकी सत्यता और स्थान का सही सत्यापन करेंगे। सोशल मीडिया पर फैलती भ्रामक जानकारियों पर अंकुश लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा फैक्ट-चेकिंग व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग भी उठ रही है।

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