राजस्थान: मुकंदरा चेचट टनल में भरा 3 फीट तक पानी, दीवारों से रिसाव के बाद ट्रैफिक डायवर्ट, 1100 करोड़ के प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
मुकंदरा चेचट टनल में पहली बारिश में जलभराव हुआ। दीवारों से रिसाव और 3 फीट पानी भरने से यातायात प्रभावित, प्रशासन ने गोपालपुरा रूट से ट्रैफिक डायवर्ट किया।
- मुकंदरा चेचट टनल में पहली ही बारिश से जलभराव, 1100 करोड़ के प्रोजेक्ट पर उठे सवाल
- पहली ही बारिश में पानी-पानी हुई 1100 करोड़ की मुकंदरा चेचट टनल, जलभराव से बदला ट्रैफिक रूट
- राजस्थान: मुकंदरा चेचट टनल में 3 फीट तक भरा पानी, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल
राजस्थान में मानसून की पहली ही तेज बारिश ने ढांचागत विकास और निर्माण मानकों की पोल खोलकर रख दी है। करीब 1100 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार की गई मुकंदरा चेचट टनल में पहली बारिश के बाद भीषण जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। टनल के भीतर दो से तीन फीट तक पानी जमा हो जाने और दीवारों से लगातार पानी रिसने की वजह से आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई। इस अप्रत्याशित हालात को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर एहतियाती कदम उठाए गए और यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए गाड़ियों को गोपालपुरा की तरफ से निकाला गया। संबंधित विभागों द्वारा स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मानसून के शुरुआती दौर में ही बुनियादी ढांचे से जुड़ी एक गंभीर लापरवाही सामने आई है। राजस्थान के मुकंदरा चेचट क्षेत्र में निर्मित टनल, जिसे हाल ही में भारी बजट के साथ आम जनता के आवागमन के लिए तैयार किया गया था, पहली ही मूसलाधार बारिश का सामना नहीं कर सकी। बारिश का दौर शुरू होते ही टनल के मुख्य मार्ग पर तेजी से पानी का भराव शुरू हो गया। कुछ ही घंटों के भीतर जलस्तर बढ़कर 2 से 3 फीट तक पहुंच गया, जिससे वाहनों के पहिए थम गए। पानी के इस भराव के कारण टनल के भीतर एक बड़े हिस्से में जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई।
इसके अलावा टनल की मजबूती और निर्माण तकनीक पर सबसे बड़ा सवाल तब उठा, जब इसकी कंक्रीट दीवारों से पानी की धार गिरती हुई दिखाई दी। सुरंग की आंतरिक दीवारों से हो रहे इस निरंतर रिसाव ने यह साफ कर दिया कि निर्माण के दौरान वॉटरप्रूफिंग और ड्रेनेज प्लानिंग में गंभीर खामियां रह गई थीं।
मानसून की पहली बारिश शुरू होते ही टनल के भीतर स्थिति बिगड़ने लगी। शुरुआत में जल निकासी के आउटलेट पर्याप्त न होने के कारण पानी जमा होना शुरू हुआ। देखते ही देखते सुरंग के निचले हिस्से में पानी एकत्र हो गया और पानी का स्तर दो से तीन फीट तक पहुंच गया। इतने गहरे पानी में छोटे वाहनों के बंद होने का खतरा पैदा हो गया, वहीं बड़े वाहनों के लिए भी आवाजाही जोखिम भरी हो गई।
टनल के भीतर मौजूद लाइटों और सुरक्षा उपकरणों के आसपास दीवारों से पानी झरने की तरह गिरने लगा। इससे न केवल दृश्यता प्रभावित हुई, बल्कि बिजली के शॉर्ट सर्किट और सुरंग की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर भी यात्रियों में भय का माहौल बन गया। स्थिति बिगड़ती देख टनल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस को तुरंत अलर्ट किया गया।
घटना स्थल पर पहुंची टीम ने स्थिति की गंभीरता को समझा और दुर्घटना से बचने के लिए टनल के माध्यम से होने वाले ट्रैफिक को अस्थायी रूप से रोक दिया। इसके बाद यातायात को गोपालपुरा की ओर जाने वाले वैकल्पिक रास्ते पर डायवर्ट किया गया ताकि जाम की स्थिति न बने और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस घटना के सार्वजनिक होने के बाद क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और दैनिक यात्रियों में गहरा असंतोष देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि 1100 करोड़ रुपए की भारी लागत से बने इस प्रोजेक्ट में यदि पहली ही बारिश में यह हाल है, तो आने वाले पूरे मानसून सीजन में सुरक्षा का क्या होगा। यात्रियों ने निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली और सरकारी निगरानी तंत्र पर सीधे सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, स्थानीय प्रशासन और निर्माण विभाग के सूत्रों के अनुसार, ड्रेनेज सिस्टम में आई तकनीकी खराबी को दूर करने के लिए इंजीनियरों की टीम को तैनात कर दिया गया है। संबंधित अधिकारियों का कहना है कि जलभराव के मुख्य कारणों की जांच की जा रही है और पंपों के जरिए पानी निकालने की व्यवस्था की गई है। हालांकि, निर्माण कंपनी की ओर से रिसाव के कारणों पर अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।
मुकंदरा चेचट टनल में पानी भरने का सीधा असर क्षेत्रीय यातायात और परिवहन पर पड़ा है। इस मार्ग से गुजरने वाले भारी वाहनों और वाणिज्यिक परिवहन को वैकल्पिक मार्गों से भेजना पड़ा, जिससे यात्रा के समय में बढ़ोतरी दर्ज की गई। गोपालपुरा मार्ग पर अचानक ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाने से उस रूट पर भी गाड़ियां धीमी गति से चलती नजर आईं।
इसके अतिरिक्त, इस घटना ने सार्वजनिक धन के उपयोग और ढांचागत परियोजनाओं की गुणवत्ता पर एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। करोड़ों की लागत से तैयार राष्ट्रीय स्तर की परियोजनाओं में यदि जल निकासी जैसी मूलभूत व्यवस्था विफल होती है, तो इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। फिलहाल प्राथमिकता टनल के भीतर जमा पानी को पूरी तरह बाहर निकालने और ट्रैफिक को सुरक्षित रूप से बहाल करने की है। इसके बाद निर्माण एजेंसी और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम टनल की दीवारों से हो रहे रिसाव का निरीक्षण करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि टनल के ड्रेनेज सिस्टम को पूरी तरह री-डिजाइन या अपग्रेड करना पड़ सकता है ताकि आने वाली तेज बारिश में ऐसी स्थिति दोबारा न बने। प्रशासन की ओर से पूरी रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजे जाने की संभावना है, जिसके आधार पर निर्माण मानकों में लापरवाही बरतने वालों पर जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
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