संसद में एमएसएमईडी संशोधन विधेयक 2026 पारित, जानें एमएसएमई क्षेत्र को क्या मिलेंगे बड़े फायदे
संसद ने एमएसएमईडी संशोधन विधेयक 2026 पारित किया। इससे बकाया भुगतान की त्वरित वसूली, डिजिटल पंजीकरण और एमएसएमई कारोबारियों को कई राहतें मिलेंगी।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए व्यावसायिक गतिविधियों को सुगम, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से संसद ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक 2026 को स्वीकृति प्रदान कर दी है। वर्ष 2006 में बने मूल कानून में करीब दो दशकों के बाद किए गए इन व्यापक बदलावों से देश भर के करोड़ों छोटे कारोबारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उद्यम पंजीकरण प्रणाली पर पंजीकृत इकाइयों की संख्या 9 करोड़ से अधिक हो चुकी है। यह क्षेत्र 40 करोड़ से अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करता है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में प्रमुख भूमिका निभाता है। डिजिटल प्रणालियों के विस्तार और आधुनिक औद्योगिक जरूरतों को देखते हुए विधायी ढांचे को अद्यतन किया गया है।
नये संशोधन के अंतर्गत उद्यम पंजीकरण पोर्टल को स्थायी वैधानिक मान्यता प्रदान की गई है। एमएसएमई वर्गीकरण के लिए प्लांट-मशीनरी निवेश और टर्नओवर के मापदंडों को आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। बकाया भुगतान से जुड़े विवादों के त्वरित समाधान के लिए तंत्र को सख्त बनाया गया है। यदि मध्यस्थता संबंधी अपील लंबे समय तक लंबित रहती है, तो न्यायालय को आपूर्तिकर्ता के पक्ष में निर्धारित राशि का कम से कम 50 प्रतिशत जारी कराने का प्रावधान किया गया है।
बकाये की प्रभावी वसूली के लिए इसे भू-राजस्व की तर्ज पर वसूलने की शक्ति दी गई है। सरकारी खरीद में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने हेतु डिजिटल प्लेटफॉर्म (TReDS) के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा, राज्यों को कई सुविधा परिषदें गठित करने का अधिकार दिया गया है। छोटे तकनीकी उल्लंघनों पर कड़े दंड के बजाय चेतावनी और नागरिक जुर्माने का प्रावधान कर व्यापार करने की प्रक्रिया को और अधिक सहूलियत प्रदान की गई है।
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