UP Teacher Training Program: उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा को मजबूत करने की बड़ी पहल, 20 जिलों के मेंटर्स ले रहे विशेष ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने निपुण भारत मिशन के तहत मास्टर ट्रेनर्स के राज्य स्तरीय प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू किया है। इसमें 20 जिलों के मेंटर्स भाग ले रहे हैं।
- Nipun Bharat Mission UP: निपुण भारत मिशन को रफ्तार देने में जुटी योगी सरकार, मास्टर ट्रेनर्स के प्रशिक्षण का दूसरा चरण शुरू
- यूपी की बुनियादी शिक्षा में बड़ा बदलाव: योगी सरकार ने शुरू किया मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण, डिजिटल टूल्स पर विशेष फोकस
- Nipun Bharat UP Update: लखनऊ में पांच दिवसीय राज्य स्तरीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण का आगाज
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्राथमिक शिक्षा के स्तर को सुधारने और निपुण भारत मिशन को ग्रामीण स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए बड़े पैमाने पर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य के साथ राज्य सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने के लिए जनपद स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार को लखनऊ में की। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में प्रदेश के 20 जनपदों से आए राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) के सदस्य और डायट मेंटर्स हिस्सा ले रहे हैं। यहां प्रशिक्षित होने वाले मास्टर ट्रेनर्स आगे चलकर ब्लॉक और जिला स्तर पर लाखों प्राथमिक शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण विधियों की ट्रेनिंग देंगे, जिससे आगामी समय में प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को एक नया और सुदृढ़ ढांचा मिल सके।
यह आयोजन निपुण भारत मिशन के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित एक राज्यव्यापी शिक्षक क्षमता संवर्धन कार्यक्रम है। इस अभियान का मूल उद्देश्य सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों में आधारभूत भाषा, पढ़ने की क्षमता और गणितीय दक्षता का विकास करना है। इसके लिए राज्य स्तर पर शिक्षा विशेषज्ञों की देखरेख में मास्टर ट्रेनर्स तैयार किए जा रहे हैं, जो जिले के अन्य शिक्षकों को खेल-कूद और विभिन्न गतिविधियों पर आधारित आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से अवगत कराएंगे।
सोमवार से शुरू हुआ यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम निपुण भारत मिशन के तहत बनाई गई रणनीतिक शृंखला की दूसरी महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे पहले इस अभियान का प्रथम चरण पिछले महीने सफलतापूर्वक संपन्न किया जा चुका है। तय योजना के अनुसार, इस दूसरे चरण के पूरा होने के बाद जिला स्तरीय मास्टर ट्रेनर्स के लिए दो और चरणों का आयोजन किया जाएगा, जिससे पूरे उत्तर प्रदेश में एक मजबूत और पारदर्शी शैक्षणिक प्रशिक्षण नेटवर्क तैयार किया जा सके।
मौजूदा प्रशिक्षण बैच में राज्य के 20 अलग-अलग जनपदों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। प्रत्येक जिले से दो अनुभवी राज्य संसाधन समूह (एसआरजी) सदस्यों और दो डायट मेंटर्स का चयन कर उन्हें आधुनिक शिक्षण टूल्स की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। यह पूरी प्रक्रिया बेहद व्यावहारिक और सहभागितापूर्ण रखी गई है, जिसमें सामूहिक चर्चा, व्यावहारिक प्रदर्शन, सहकर्मी अधिगम और कक्षा-कक्ष के प्रत्यक्ष अनुभवों को साझा करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
डिजिटल संसाधनों और नवीन पद्धतियों पर फोकस
इस प्रशिक्षण सत्र का मुख्य एजेंडा पारंपरिक शिक्षा पद्धति के स्थान पर दक्षता आधारित और गतिविधि आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना है। प्रशिक्षण के दौरान मेंटर्स को प्रिंट-समृद्ध शैक्षणिक सामग्री, नए टीचिंग लर्निंग मैटेरियल (TLM) के निर्माण और बच्चों के साप्ताहिक मूल्यांकन की सटीक रणनीतियों के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है।
इसके साथ ही, तकनीकी रूप से शिक्षा को जोड़ने के लिए 'दीक्षा ऐप' और 'निपुण टीचर ऐप' जैसे डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेंटर्स को यह भी सिखाया जा रहा है कि वे किस प्रकार स्कूलों में 'कैच-अप शिक्षण' और 'रीडिंग कैंपेन' जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित कर बच्चों के सीखने की क्षमता (लर्निंग आउटकम) में गुणात्मक सुधार ला सकते हैं।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशिक्षण में भाग ले रहे मेंटर्स का कहना है कि यह कार्यक्रम शिक्षकों के दृष्टिकोण को बदलने में मील का पत्थर साबित होगा। प्रशिक्षकों के अनुसार, जब तक शिक्षक आधुनिक और रोचक तरीकों से बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे, तब तक बुनियादी साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन है। डायट मेंटर्स ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि डिजिटल ऐप्स और गतिविधि आधारित शिक्षण विधियों से लैस होने के बाद जब वे जिलों में जाकर अन्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे, तो इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मिलेगा।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मिशन मोड में चलाए जा रहे इस अभियान का उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा ढांचे पर व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। विद्यालय कायाकल्प योजना के तहत जहां एक ओर स्कूलों के भौतिक स्वरूप को सुधारा गया है, वहीं इस शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम से अकादमिक गुणवत्ता में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।
इस चरण के समाप्त होने के बाद, ये मास्टर ट्रेनर्स अपने-अपने आवंटित जिलों और ब्लॉकों में जाकर जमीनी स्तर पर कार्यशालाएं आयोजित करेंगे। सरकार का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश का प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय 'निपुण विद्यालय' की श्रेणी में आ सके और कोई भी बच्चा बुनियादी शिक्षा के स्तर पर पीछे न छूटे।
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