यूपी में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने की तैयारी: मुख्य सचिव ने विभागों को दिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने सभी विभागों को सरकारी जमीन की पहचान करने के सख्त निर्देश दिए हैं।

Jul 14, 2026 - 21:47
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यूपी में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने की तैयारी: मुख्य सचिव ने विभागों को दिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों के विकास को मिलेगी रफ्तार, मुख्य सचिव ने सभी सरकारी विभागों को उपयुक्त जमीन तलाशने को कहा

उत्तर प्रदेश में पर्यावरण के अनुकूल और आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रदेश में सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशनों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करने के लिए मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अगुवाई में एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के लिए जरूरी जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करना था। मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना राज्य में स्वच्छ और हरित परिवहन को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों और विकास प्राधिकरणों को आपसी तालमेल के साथ काम करते हुए बुनियादी ढांचे को तेजी से विकसित करने के निर्देश दिए।

प्रशासनिक बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सख्त निर्देश जारी किए कि सभी सरकारी विभाग और विकास प्राधिकरण अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली खाली जमीनों, कार्यालय परिसरों और अन्य सार्वजनिक स्थलों का जल्द से जल्द सर्वे पूरा करें। इस सर्वे के माध्यम से ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान की जाएगी और उनका पूरा ब्योरा यूपी रिन्यूएबल एंड ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (UPREV) को एक तय प्रारूप में भेजा जाएगा। इस योजना के दायरे में विभिन्न विभागों के दफ्तर, नगर निगमों के पार्किंग स्थल, औद्योगिक क्षेत्र, लॉजिस्टिक पार्क और राज्य के प्रमुख राजमार्गों व एक्सप्रेसवे के किनारे मौजूद खाली स्थान शामिल किए जाएंगे।

योजना को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की तैनाती की जाएगी, जो विभागों के बीच समन्वय का काम संभालेंगे। मुख्य सचिव ने कहा कि चार्जिंग स्टेशन के लिए चुनी गई जमीनों को प्राथमिकता के आधार पर आवंटित किया जाएगा। विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संभावित जगहों की रिपोर्ट तैयार करते समय उस स्थान का नाम, पूरा पता, वहां के फोटोग्राफ और अक्षांश व देशांतर की सटीक भौगोलिक जानकारी शामिल करें। इसके साथ ही उपलब्ध जमीन के कुल क्षेत्रफल का स्पष्ट ब्योरा देना भी जरूरी होगा।

चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में जमीन के मानक तय किए गए हैं। शहरी इलाकों में एक स्टेशन के लिए करीब 400 से 600 वर्ग फुट जगह की आवश्यकता होगी, जबकि राज्य राजमार्गों और एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर बड़े स्टेशनों के निर्माण के लिए लगभग 3000 वर्ग फुट जमीन की जरूरत पड़ेगी। सरकार का मानना है कि सार्वजनिक स्थानों पर चार्जिंग की बेहतर और सुलभ व्यवस्था होने से आम नागरिक इलेक्ट्रिक वाहनों को खरीदने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में बड़ी मदद मिलेगी। इस अहम बैठक में शासन स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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