Hardoi : 'स्वस्थ बीज, समृद्ध किसान' अभियान की शुरुआत, फसलों को बीमारियों से बचाने के लिए बीज शोधन बेहद जरूरी
कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष को बीज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें बीजों को शुद्ध करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 'स्वस्थ बीज, समृद्ध किसान' नाम के इस अभियान के तहत किसानों को सिखाया जा रहा है कि वे बीजों को बीमारियों से बचाने के लिए बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बी
हरदोई जिले की सभी ग्राम पंचायतों में किसानों को फसलों की बेहतर पैदावार और बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करने के लिए एक विशेष बीज शोधन अभियान चलाया जा रहा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि हर साल फसलों में लगने वाले कीड़ों, बीमारियों और खरपतवार की वजह से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। इसके साथ ही खेती में रसायनों के अंधाधुंध इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इन समस्याओं से बचने के लिए बुवाई से पहले बीजों का शोधन यानी उपचार करना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ फसलों की पैदावार बढ़ती है और लागत कम होती है, बल्कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को भी रोका जा सकता है।
कृषि विभाग द्वारा इस वर्ष को बीज वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, जिसमें बीजों को शुद्ध करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। 'स्वस्थ बीज, समृद्ध किसान' नाम के इस अभियान के तहत किसानों को सिखाया जा रहा है कि वे बीजों को बीमारियों से बचाने के लिए बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज में 5 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा हारजेनियम मिलाकर उसका उपचार करें। इसके अलावा धान की नर्सरी तैयार करने से पहले 3 ग्राम कार्बेन्डाजिम (50 प्रतिशत डब्लू.पी.) प्रति किलोग्राम बीज की दर से धान का उपचार करना चाहिए। ऐसा करने से धान की नर्सरी में लगने वाले भूरा धब्बा और सीड बलाइट जैसे रोगों का खतरा बहुत कम हो जाता है।
अधिकारियों ने किसानों को धान के साथ-साथ मूंग, उड़द, मूंगफली, ज्वार, बाजरा और मक्का जैसी अन्य फसलों के बीजों का भी शोधन करने की सलाह दी है। किसानों की सुविधा के लिए यह जरूरी रसायन जिले की सभी सरकारी कृषि रक्षा इकाइयों पर 50 प्रतिशत के अनुदान (छूट) पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि किसान कम खर्च में अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकें।
What's Your Reaction?




